रायगढ़। एसईसीएल छाल उपक्षेत्र के अंतर्गत ओबी और कोयला ठेका कंपनी एसकेए में कार्यरत श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रशासन ने त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की। श्रमिकों ने बुधवार को तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर एचपीसी दर के अनुसार मजदूरी नहीं मिलने, भुगतान में कटौती और बोनस नहीं मिलने समेत कई गंभीर शिकायतें की थीं।

एचपीसी दर से भुगतान नहीं करने का आरोप
श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी में कार्यरत सभी मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित एचपीसी दर के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है। कुछ श्रमिकों को बैंक खाते के माध्यम से भुगतान किया जाता है, जबकि अन्य को नगद राशि दी जाती है। मजदूरी में कटौती किए जाने और भुगतान की पेमेंट स्लिप नहीं देने की शिकायत भी श्रमिकों ने की है।
पेमेंट स्लिप और बोनस को लेकर भी शिकायत
श्रमिकों के अनुसार वेतन की पेमेंट स्लिप मांगने पर कंपनी प्रबंधन द्वारा टालमटोल की जाती है। वहीं अब तक श्रमिकों को बोनस की राशि नहीं दिए जाने की बात भी ज्ञापन में कही गई है। श्रमिकों ने प्रशासन से इन मामलों की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की।
खाना और कमरे के नाम पर 6 हजार रुपये कटौती का आरोप
श्रमिकों ने बताया कि जो कर्मचारी अपने घर से कंपनी आते-जाते हैं और कंपनी में खाना नहीं खाते, उनके वेतन से भी खाना और कमरे के नाम पर हर महीने 6 हजार रुपये काटे जाते हैं। इसके अलावा श्रमिकों ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए जरूरी सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया।
शिकायत करने पर नौकरी से निकालने की धमकी
श्रमिकों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर कंपनी प्रबंधन से बातचीत करते हैं तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। मामले की शिकायत के बाद प्रशासन ने श्रमिकों और कंपनी प्रबंधन को आमने-सामने बैठाकर त्रिपक्षीय वार्ता कराई।
श्रम कानूनों का पालन करने के निर्देश
बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ श्रम विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन को श्रम कानूनों का पालन करने तथा सभी श्रमिकों को बैंक खाते के माध्यम से भुगतान करने के निर्देश दिए। साथ ही दोनों पक्षों को शांति व्यवस्था बनाए रखने की समझाइश दी गई।
कानून का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
तहसीलदार छाल लोमेश मिरी ने बताया कि एसकेए कंपनी के श्रमिकों और प्रबंधन को बैठक के लिए बुलाया गया था। प्रशासन और श्रम विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों की समस्याएं सुनी गईं और श्रम कानूनों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शांति व्यवस्था भंग करने या कानून का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।





