10 साल से खड़ा Jio टावर, फिर भी मोबाइल में ‘नो नेटवर्क’!
गोसाईडीह में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—टावर बना शोपीस, नेटवर्क के इंतजार में बीत गए साल!
गोसाईडीह (लैलूंगा)। ग्राम पंचायत गोसाईडीह में ग्रामीणों को बेहतर मोबाइल नेटवर्क की सुविधा देने के उद्देश्य से करीब 10 वर्ष पहले Jio का मोबाइल टावर लगाया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि इतने वर्षों बाद भी ग्रामीणों के मोबाइल में नेटवर्क की समस्या जस की तस बनी हुई है। टावर खड़ा है, लेकिन नेटवर्क नदारद है।
टावर लगा, लेकिन नेटवर्क नहीं आया!
ग्रामीणों का कहना है कि टावर लगाए जाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब मोबाइल कॉलिंग और इंटरनेट की समस्या दूर हो जाएगी। लेकिन वर्षों गुजरने के बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। आसपास के ग्रामीण आज भी मोबाइल में नेटवर्क तलाशने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
जरूरी कॉल के लिए ऊंची जगह का सहारा
नेटवर्क की समस्या के चलते ग्रामीणों को जरूरी फोन कॉल करने के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है, कई बार ऊंची जगहों पर जाकर मोबाइल में नेटवर्क तलाशना पड़ता है। इंटरनेट की जरूरत वाले कामों में भी ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
10 साल से समस्या, जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का सवाल है कि जब करीब एक दशक पहले मोबाइल टावर लगाया गया था तो आखिर आज तक नेटवर्क सेवा सुचारू क्यों नहीं हो सकी? टावर लगाने के बाद उसकी तकनीकी स्थिति, बिजली आपूर्ति और कनेक्टिविटी की नियमित जांच हुई या नहीं, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।
आपात स्थिति में बढ़ सकती है परेशानी
मोबाइल नेटवर्क आज केवल बातचीत का माध्यम नहीं बल्कि आपातकालीन सेवाओं, ऑनलाइन सरकारी कामकाज, बैंकिंग, शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं के लिए भी जरूरी है। ऐसे में नेटवर्क सुविधा से वंचित ग्रामीणों की परेशानी को नजरअंदाज करना गंभीर विषय है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं Jio कंपनी के अधिकारियों से मांग की है कि गोसाईडीह में लगे मोबाइल टावर की तत्काल तकनीकी जांच कराकर नेटवर्क सेवा शुरू की जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान हो सके।
दशकभर पहले लाखों की लागत से खड़ा किया गया टावर आखिर किस काम का, जब ग्रामीणों के मोबाइल में आज भी नेटवर्क नहीं?
ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, चाहिए मोबाइल नेटवर्क की ठोस सुविधा।








