वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की अपील का समर्थन करते हुए विजय शर्मा बोले—गरबा मनोरंजन का इवेंट नहीं, धार्मिक आस्था से जुड़ी आराधना; आयोजकों से भी नियम लागू करने की अपील
जगदलपुर। शारदीय नवरात्रि के साथ छत्तीसगढ़ में गरबा आयोजनों की धूम है। इसी बीच गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की अपील का समर्थन करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि गरबा केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि मां की आराधना और धार्मिक आस्था से जुड़ा माध्यम है। जिन लोगों की इसमें आस्था नहीं है, उन्हें गरबा पंडालों में नहीं जाना चाहिए।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के बयान से जताई सहमति
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि वे डॉ. सलीम राज के बयान से सौ प्रतिशत सहमत हैं। उन्होंने कहा कि गरबा और मां की आराधना में श्रद्धा रखने वालों को ही इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरबा को महज एक सामान्य इवेंट या मनोरंजन कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
आयोजकों से नियम लागू करने की अपील
विजय शर्मा ने गरबा आयोजकों से भी आयोजन की धार्मिक भावना और आस्था को ध्यान में रखते हुए आवश्यक नियम लागू करने की अपील की। उनका कहना है कि जब किसी आयोजन का उद्देश्य मां की आराधना है, तो उसमें शामिल होने वालों के लिए उस आस्था का सम्मान करना भी जरूरी है।
सुकमा में बाहरी लोगों की एंट्री पर भी बोले विजय शर्मा
सुकमा जिले के ग्रामीण इलाकों में पंचायतों द्वारा बाहरी लोगों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध के सवाल पर भी उपमुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निर्णय लेने का अधिकार है।
संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का अधिकार
विजय शर्मा ने कहा कि पंचायत क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर सामान्य तौर पर प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम सभा अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए निर्णय ले सकती है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए ग्राम सभा को मिले अधिकारों को महत्वपूर्ण बताया।






