12 अक्टूबर को राहुल गांधी के आह्वान पर प्रदर्शन में शामिल हुआ इंटक महासंघ; चारों लेबर कोड वापस लेने, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर 12 अक्टूबर 2026 को राजधानी दिल्ली में ‘दिल्ली चलो’ विरोध प्रदर्शन एवं महाआंदोलन आयोजित किया गया। संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों और श्रमिकों ने हिस्सा लिया। भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस महासंघ (इंटक महासंघ) ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
स्वामीनाथ जायसवाल के नेतृत्व में इंटक महासंघ की भागीदारी
इंटक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ जायसवाल के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। महासंघ के अनुसार, इस दौरान संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की गई।
स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा कि मजदूरों, किसानों और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई में उनका संगठन मजबूती से खड़ा है। उन्होंने श्रमिक हितों की रक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
चार लेबर कोड रद्द करने और सामाजिक सुरक्षा की मांग
प्रदर्शन के दौरान इंटक महासंघ ने चार लेबर कोड को वापस लेने, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई।
संगठन का कहना है कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और उनके लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। महासंघ ने इन मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई।
महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
आंदोलन में शामिल वक्ताओं ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने इन मुद्दों के विरोध में नारेबाजी करते हुए आम जनता और श्रमिकों की समस्याओं को सामने रखा।
इंटक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा कि उनका संगठन श्रमिकों के स्वाभिमान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे जनहित के मुद्दों को समर्थन देने की बात भी कही।
न्यायपालिका और संवैधानिक अधिकारों पर भी उठाए सवाल
महाआंदोलन के दौरान न्यायपालिका की भूमिका, संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी जैसे मुद्दों पर भी वक्ताओं ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों और मजदूरों को समय पर न्याय मिलना चाहिए तथा उनके संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा होनी चाहिए।
वक्ताओं ने न्याय में देरी को गंभीर विषय बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प
इंटक महासंघ ने कहा कि श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़े मुद्दे संगठन की प्राथमिकता में रहेंगे। महासंघ के मुताबिक, दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन के माध्यम से इन मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया गया।











