spot_img
spot_img

लैलूँगा के बनेकेला में भोजली विसर्जन का धूमधाम : झांझ-मंदार की थाप पर गूंजा गांव, बनी नई ‘महाप्रसादी’ दोस्ती

spot_img
spot_img
spot_img

लैलूँगा के बनेकेला में भोजली विसर्जन का धूमधाम: झांझ-मंदार की थाप पर गूंजा गांव, बनी नई ‘महाप्रसादी’ दोस्ती

लैलूंगा। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में एक खास पहचान रखने वाला भोजली पर्व इस साल भी लैलूंगा के बनेकेला गांव में बाजे-गाजे और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। ग्रामीण अंचल में यह पर्व हरियाली, खुशहाली और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। शनिवार को नवाखाई के मौके पर पूरे गांव में महिलाएं और कन्याएं भोजली लेकर विसर्जन यात्रा में शामिल हुईं और तालाब के घाट पर हर्षोल्लास के साथ देवी भोजली का विसर्जन किया गया।

सुबह से ही गांव की महिलाएं और कुंवारी लड़कियां गेहूं और जौ के बीज से तैयार की गई भोजली को सजाकर सिर पर टोकरी रखकर पारंपरिक गीत गाती हुई जुलूस की शक्ल में घाट की ओर निकलीं। झांझ, मंदार और नगाड़ों की थाप पर गूंजते गांव में जब महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंग गया। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इस जुलूस का हिस्सा बने।

गांव की महिलाओं ने बताया कि भोजली केवल पूजा-पाठ या परंपरा नहीं है, बल्कि यह खेती-किसानी से जुड़ी आस्था का पर्व है। इसमें खेतों की समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। विसर्जन से पहले महिलाओं ने भोजली देवी की आरती उतारी और अच्छे मौसम तथा भरपूर फसल की प्रार्थना की।

इस पर्व का सबसे भावुक और अनोखा क्षण तब देखने को मिला जब गांव की लड़कियों ने ‘भोजली बदना’ की रस्म निभाई। इस रस्म के तहत वे एक-दूसरे के कान में भोजली की बाली लगाकर जीवनभर की दोस्ती निभाने का वचन देती हैं। इस दोस्ती को ‘महाप्रसादी रिश्ता’ कहा जाता है, जिसमें वे एक-दूसरे को नाम लेकर नहीं पुकारतीं, बल्कि हमेशा ‘भोजली’ या ‘महाप्रसाद’ कहकर ही संबोधित करती हैं। यह परंपरा सामाजिक भाईचारे और आपसी विश्वास की मिसाल है।

बनेकेला गांव में भोजली विसर्जन उत्सव को देखने और इसमें शामिल होने के लिए आसपास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे। विसर्जन यात्रा के दौरान जगह-जगह ढोल-नगाड़ों की थाप और गीतों की गूंज ने माहौल को जीवंत बना दिया। इस अवसर पर गांव के मान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

गांव की महिलाओं का कहना था कि भोजली पर्व उनकी शक्ति, श्रद्धा और किसानों की मेहनत का प्रतीक है। यह पर्व न केवल हरियाली और कृषि की संस्कृति को दर्शाता है, बल्कि समाज में एकता और दोस्ती का संदेश भी देता है।

बनेकेला में भोजली विसर्जन का यह आयोजन इस बार बेहद भव्य और ऐतिहासिक साबित हुआ। गांव के लोग इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोकर रखने की बात कह रहे हैं। भोजली के गीत और झांझ-मंदार की गूंज देर रात तक गांव में सुनाई देती रही।

spot_img
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.32 AM
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.32 AM (1)
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.31 AM (1)
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.33 AM (1)
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.31 AM
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.33 AM
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.34 AM (1)
WhatsApp Image 2026-10-12 at 10.32.34 AM
चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
spot_img
spot_img

Recent Posts

भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन बिलासपुर का किया घेराव, निष्पक्ष जाँच एवं उचित कार्रवाई की माँग

बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा जिला बिलासपुर शहर एवं ग्रामीण के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल...

CHHATTISGARH NEWS

भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन बिलासपुर का किया घेराव, निष्पक्ष जाँच एवं उचित कार्रवाई की माँग

बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा जिला बिलासपुर शहर एवं ग्रामीण के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल...

RAIGARH NEWS

Raigarh News: पुसौर के स्कूलों में करियर मार्गदर्शन कार्यशाला, विद्यार्थियों को बताए प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के रास्ते

सेवा संकल्प अभियान के तहत हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी के विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन, विषय चयन से लेकर स्वरोजगार तक के अवसरों की दी...