

30 की उम्र में 7 बार रक्तदान कर चमका युवा पत्रकार शशि सिदार का जज़्बा!
लैलूंगा। युवा पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके शशि सिदार ने एक बार फिर समाजसेवा का उदाहरण पेश किया है। 30 वर्ष की आयु में अब तक 7 बार रक्तदान कर चुके शशि ने आज अपने जन्मदिन को भी कुछ अलग अंदाज में मनाया। जहां लोग जन्मदिन के मौके पर पार्टी और मौज-मस्ती में मशगूल रहते हैं, वहीं शशि ने रक्तदान कर न केवल जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरणादायी संदेश भी दिया।
आज सुबह लैलूंगा अस्पताल में शशि सिदार ने रक्तदान कर अपने जीवन के इस खास दिन को और भी खास बना दिया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ नागरिकों और साथियों ने उनके इस कदम की खुलकर सराहना की। लोग उन्हें बधाई देने उमड़ पड़े। शशि सिदार फिलहाल गोड़ समाज युवा प्रभाग संघ के सचिव के रूप में सक्रिय हैं और समाज के उत्थान के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
रक्तदान बना सेवा का संकल्प
शशि सिदार का मानना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। “एक यूनिट रक्त कई जीवन बचा सकता है, और जब हमारे छोटे-से प्रयास से किसी की सांसें चलती रहें तो इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है।” यही सोच उन्हें बार-बार रक्तदान के लिए प्रेरित करती है।
पत्रकारिता और समाज सेवा का मेल
पत्रकारिता में निष्पक्ष और निडर आवाज के रूप में पहचान रखने वाले शशि सिदार ने समाज सेवा में भी अपना लोहा मनवाया है। उनका कहना है कि पत्रकार का दायित्व केवल खबर दिखाना ही नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना भी है। रक्तदान कर उन्होंने इस जिम्मेदारी को एक नई ऊँचाई दी है।
बधाइयों की लगी झड़ी
गोड़ समाज के वरिष्ठ जनों और अन्य सामाजिक संगठनों ने शशि सिदार को जन्मदिन और उनके रक्तदान दोनों के लिए शुभकामनाएं दीं। लोगों का कहना है कि ऐसे युवाओं पर पूरे समाज को गर्व है। वहीं, IN24 Live चैनल से जुड़े उनके सहयोगियों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शशि की यह सोच और कर्म पत्रकारिता को नई दिशा दे रही है।
संदेश युवाओं के नाम
शशि ने अपने जन्मदिन के अवसर पर युवाओं से भी अपील की कि वे आगे आकर रक्तदान करें और समाज को सेवा की राह दिखाएं। उन्होंने कहा, “जिंदगी का सही मतलब तभी है जब हम किसी के काम आ सकें। हर जन्मदिन को अगर हम सेवा और त्याग से जोड़ें तो समाज बदलते देर नहीं लगेगी।”
कुल मिलाकर, 30 साल की उम्र में 7 बार रक्तदान कर शशि सिदार ने यह साबित कर दिया है कि असली खुशी देने में है, लेने में नहीं। उनकी यह सोच और पहल आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम करेगी।








