

टटकेला में कीचड़ का साम्राज्य! मुड़ापारा के लोग फंसे दलदल में — जनप्रतिनिधि बने मूकदर्शक
लैलूंगा ब्लॉक की ग्राम पंचायत टटकेला के मोहल्ला मुड़ापारा में सड़क की दुर्दशा ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बरसात खत्म हो चुकी है, लेकिन यहां के रास्ते अब भी कीचड़ नुमा दलदल में तब्दील हैं। गांव का मुख्य मार्ग इतना खराब हो चुका है कि पैदल चलना भी किसी साहसिक अभियान से कम नहीं!
गांव के लोग रोजाना इस रास्ते से होकर स्कूल, बाजार और कामकाज के लिए निकलते हैं, लेकिन हर कदम पर फिसलन और गंदगी से जूझना पड़ता है। बच्चों के पैरों में मिट्टी चिपक जाती है, बुजुर्ग गिर जाते हैं, महिलाएं सिर पर बोझ लेकर निकलती हैं तो फिसलकर चोट खा जाती हैं — मगर प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों खामोश!
गांव के निवासी ने बताया कि “हर बार चुनाव में नेता लोग सड़क बनाने का वादा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ जुमले ही मिले हैं।” स्थानीय लोगों का कहना है कि सरपंच और सचिव को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन जवाब में सिर्फ “देखते हैं” सुनने को मिला।
गांव के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र तक जाने का मुख्य मार्ग है। नालियां जाम हैं, पानी का निकास नहीं है, जिससे सड़क हर समय कीचड़ में डूबी रहती है। गाड़ियों का निकलना तो दूर, दोपहिया वाहन तक फंस जाते हैं। लोग मजबूरी में चप्पल उतारकर नंगे पैर चलने को मजबूर हैं।
स्थानीय युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो वे ग्राम पंचायत कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि सरकार “गांव की तस्वीर बदलने” के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन मुड़ापारा का यह रास्ता सरकार की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है।
जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता और प्रशासन की उदासीनता ने ग्रामीणों का भरोसा तोड़ दिया है। एक ओर अधिकारी योजनाओं और फंड का ढोल पीटते हैं, वहीं दूसरी ओर जनता की बुनियादी जरूरत — सड़क — अब भी अधूरी है।
मुड़ापारा के लोग आज सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं —
“कब मिलेगा हमें कीचड़ से मुक्ति?”
जब तक इसका जवाब नहीं मिलता, तब तक टटकेला के इस मार्ग कीचड़ में ही सरकारी वादों का प्रतिबिंब नजर आता रहेगा।
#टटकेला_की_कीचड़_कहानी #जनता_परेशान #सड़क_कहाँ_है








