लैलूंगा में नरेगा अधिकारी दीपक एक्का की मनमानी से मचा बवाल 10 से 15 वर्षो से कुर्सी पर कब्जा, पंचायतों में ठप पड़े काम — कांग्रेस की पकड़ से बचा ‘कुर्सी किंग’!
लैलूंगा। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड में नरेगा (मनरेगा) कार्यों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। गांवों में काम ठप हैं, मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जनपद कार्यालय में बैठे नरेगा अधिकारी दीपक एक्का को कोई चिंता नहीं। सूत्रों के अनुसार, दीपक एक्का पिछले लगभग 10 से 15 वर्षों से एक ही जगह पदस्थ हैं और सत्ता परिवर्तन के बावजूद अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं। चर्चाओं में है कि एक्का की कांग्रेस पार्टी में जबरदस्त पकड़ है, जिसकी वजह से वह तबादलों और जांचों से हमेशा बचे रहे हैं।
“कुर्सी पर जमे रहने” की कला में माहिर दीपक एक्का
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को एक ही जगह तीन साल से अधिक टिकना नहीं चाहिए। लेकिन दीपक एक्का को मानो इन नियमों से कोई लेना-देना नहीं। पिछले 10 से 15 सालों से लैलूंगा मुख्यालय में जमे हुए हैं और क्षेत्र के पंचायतों में विकास कार्यों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नरेगा के नाम पर केवल फाइलों में काम हो रहे हैं, मैदान में कुछ नहीं।
पंचायतों में रोजगार सहायकों की कमी, काम ठप
लैलूंगा क्षेत्र के अधिकांश पंचायतों में रोजगार सहायक फील्ड से नदारत हैं। कई पंचायतों में तो रोजगार सहायक नियुक्त ही नहीं हैं, जिससे न तो मस्टर रोल बन पा रहा है, न मजदूरों को काम मिल पा रहा है।
जियो टैगिंग और आवास योजना का काम भी महीनों से ठप पड़ा है। ग्रामीण लगातार जनपद और ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी या तो अनुपस्थित रहते हैं या “कल आना” कहकर टाल देते हैं।
न जियो टेक, न आवास योजना ,न मस्टरोल ,ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि जियो टेक नहीं हो पाने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी महीनों से इंतजार में हैं। जिनके आवास मंजूर हो चुके हैं, उन्हें भुगतान नहीं हो पा रहा है क्योंकि तकनीकी सत्यापन अधूरा पड़ा है।
लैलूंगा क्षेत्र के कुंजारा, बिरसिंगा, झगरपुर, झरामा, केरवारजोर, पाकरगांव और रेगड़ी रोड क्षेत्र के पंचायतों में हालत सबसे खराब बताई जा रही है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कहा – “कब बदलेगा ये सिस्टम?”
ग्रामीणों ने कहा कि अगर नरेगा अधिकारी दीपक एक्का पर कार्यवाही नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से जनपद कार्यालय का घेराव करेंगे।
एक ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा –
यहां अधिकारी बदलते हैं, लेकिन दीपक एक्का नहीं बदलते! शायद लैलूंगा उनका पुश्तैनी ठिकाना बन चुका है।”
प्रशासन मौन, शिकायतें धूल खा रही हैं
जानकारी के अनुसार, कई बार पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। ब्लॉक में बैठे कुछ अधिकारियों का कहना है कि दीपक एक्का “राजनीतिक रूप से मजबूत” हैं, इसलिए कोई भी उनके खिलाफ बोलने से डरता है। कई सचिव ने रोजगार सहायक के लिए आवेदन निवेदन कर चुके है ।पर दीपक एक्का के कान में जु तक नही रेंगा।
जनता पूछ रही है — “क्या लैलूंगा में प्रशासन नाम की कोई चीज़ बची है?”
यह सवाल अब पूरे इलाके में गूंज रहा है। नरेगा जैसी योजना, जो ग्रामीणों की रोजी-रोटी का आधार है, वह कुछ अधिकारियों की लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण के कारण दम तोड़ रही है।
ग्रामीण अब जवाब और बदलाव दोनों की मांग कर रहे हैं।
अगर प्रशासन ने जल्द कार्यवाही नहीं की, तो लैलूंगा में यह मुद्दा जनआंदोलन का रूप ले सकता है — और तब दीपक एक्का की कुर्सी बचाना मुश्किल होगा!
लैलूंगा से ब्यूरो रिपोर्ट, चंद्रशेखर जायसवाल








