
लैलूंगा में धड़ल्ले से चल रही गौ तस्करी! – रात होते ही मवेशियों की हांक, प्रशासन बना मूकदर्शक

लैलूंगा। क्षेत्र में एक बार फिर कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। लैलूंगा से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक गौ तस्करी का खेल खुलेआम चल रहा है। रात के अंधेरे में तस्कर सक्रिय हो जाते हैं और दर्जनों की संख्या में गाय और भैंसों को हांककर ट्रकों व पिकअप में भरकर ले जाया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह सिलसिला पिछले कई सालों से लगातार जारी है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना देर रात कुछ संदिग्ध वाहन तेज रफ्तार में गुजरते हैं, जिनमें गाय और भैंसों को ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है। कई बार ग्रामीणों ने पुलिस और पशु विभाग को इसकी सूचना दी, लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही।
जानकारी के अनुसार, गौ तस्करी का नेटवर्क खरसिया , सकती ,धरमजय गढ़, लैलूंगा से लेकर ओड़िशा सीमा तक फैला हुआ है, जहां से मवेशियों को अवैध रूप से बाहर भेजा जाता है। इस गोरखधंधे में स्थानीय स्तर पर कुछ दलालों की भूमिका भी बताई जा रही है, जो रात के अंधेरे में खेत-खलिहानों के रास्ते से गाड़ियों को पार कराते हैं। और हॉक कर ले जाते है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस चौकियों और गश्त दलों के होते हुए भी तस्कर निर्भीक होकर सक्रिय हैं। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसे तस्करों को संरक्षण कौन दे रहा है?
लोगों की मांग है कि प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए, क्षेत्र में नाकेबंदी कर गश्त बढ़ाई जाए, और गौ तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।
जनता का सवाल साफ है — अगर प्रशासन अब भी सोया रहा, तो ग्रामीण खुद सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे!
लैलूंगा में गौ तस्करी का यह ‘रात का कारोबार’ अब जनाक्रोश का रूप लेता जा रहा है, और प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को और संदेहास्पद बना रही है!







