









जब से चुनाव लड़े, आज तक नहीं हारे,
हर जंग में जीते, बन गए जन-न्याय के प्यारे।
लैलूंगा की धरती गूंजे उनके जयकार से,
मनोज सुखन नाम चमके हर अखबार से।
वो नेता नहीं, जनसेवक कहलाते हैं,
हर दुख में साथ निभाने को जाते हैं।
गरीब का सहारा, युवाओं की पहचान,
हर दिल में बसता उनका ईमान।
विकास की बातें, कर्म में उतारते हैं,
वादे नहीं, हकीकत दिखाते हैं।
गांव हो या शहर, हर गली में शोर,
“मनोज सुखन फिर जीतेंगे” – जनता का ये जोर।
विपक्षियों को देते जवाब काम से,
जनता बोलती है – “दिल है इनके नाम से।”
जोश भी है, होश भी है,
जनता के बीच अटूट विश्वास भी है।
अजेय योद्धा, न थकने वाला नाम,
सेवा ही जिनका सबसे बड़ा काम।
हर जीत में जनता की मुस्कान छुपी है,
मनोज सुखन की कहानी – लैलूंगा की शान बनी है!








