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Monday, March 30, 2026
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भेड़ीमुड़ा ‘ब’ में मितानिन दिवस का महाधमाका — मां भारती की आरती, सम्मान का तिलक और जनप्रतिनिधियों की गूंजती उपस्थिति में मितानिन दीदियों का जबरदस्त सत्कार

भेड़ीमुड़ा ‘ब’ में मितानिन दिवस का महाधमाका — मां भारती की आरती, सम्मान का तिलक और जनप्रतिनिधियों की गूंजती उपस्थिति में मितानिन दीदियों का जबरदस्त सत्कार


भेड़ीमुड़ा ‘ब’/लैलूंगा। ग्राम पंचायत भेड़ीमुड़ा ‘ब’ में आज मितानिन दिवस भव्यता और उत्साह से भरपूर माहौल में मनाया गया। पंचायत भवन परिसर सुबह से ही पूजा-अर्चना, स्वागत-सत्कार और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती एवं छत्तीसगढ़ महतारी की विधिवत पूजा-पाठ से हुई, जिसके बाद ग्राम पंचायत के वरिष्ठ जनों ने दीप प्रज्वलन कर समारोह की औपचारिक शुरूआत की।

कार्यक्रम में गांव की तीनों मितानिन दीदियों—श्रीमती प्रतिमा देवी सिंह सिदार, श्रीमती प्रभाती प्रधान एवं आश्रित ग्राम सारसमाल की मितानिन श्रीमती सर्वेंद्री प्रधान—का शाल एवं श्रीफल से जोरदार सम्मान किया गया। इनके साथ ही सुपरवाइजर श्रीमती रूखमणि वैष्णव (ग्राम मोहनपुर) का ग्रामवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उपस्थित जनसमूह ने तालियों की ताबड़तोड़ गूंज के बीच मितानिन दीदियों की सेवाभाव, समर्पण और स्वास्थ्य सुरक्षा में किए गए अतुलनीय योगदान को सलाम किया।

मितानिनों के सम्मान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में ग्राम पंचायत भेड़ीमुड़ा ‘ब’ के जनप्रतिनिधियों की तगड़ी मौजूदगी रही। सरपंच  सुरेन्द्र सिदार, उपसरपंच नरेश निषाद, पंचगण—गौरीशंकर सिदार, अंजना सिदार, गांधी यादव, पुष्पा सिदार, अजय राठिया, खुलेश्वर सिदार, बैरागी निषाद, रंजीता सिदार, ऊषा बसोड़, धनक पैंकरा, महाराज  झनकेश्वर वैष्णव—ने एकजुट होकर मितानिन दीदियों को गांव की “लोक स्वास्थ्य प्रहरी” बताते हुए उनके प्रयासों की जमकर सराहना की।

ग्राम के ज्येष्ठ-श्रेष्ठ देवतुल्य नागरिकों, ग्रामीणों और महिला-समूहों की भारी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी ऐतिहासिक बना दिया। पूरा आयोजन सौहार्द, संस्कृति और सम्मान की मिसाल बनकर उभरा, जहां मितानिन दीदियों के प्रति गांव ने अपने समर्पण और कृतज्ञता का भव्य भाव में प्रदर्शन किया।

भेड़ीमुड़ा ‘ब’ में मितानिन दिवस का यह समारोह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण एकता, सेवा-संस्कार और जनभागीदारी का जीवंत उदाहरण बन गया—जिसने साबित कर दिया कि जब समुदाय अपने स्वास्थ्य सेवकों के साथ खड़ा हो जाए, तो विकास और संवेदनशीलता दोनों नई ऊंचाइयों को छू लेते हैं।

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