
लैलूंगा तहसील कार्यालय में शराबी कर्मचारी पर गिरी गाज, मेडिकल रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही तहसीलदार का एक्शन
लैलूंगा/ एक तरफ पूरा प्रशासन सुशासन तिहार” के तहत जनता की समस्याएं सुनने और शिविरों में समाधान देने में जुटा हुआ था… वहीं दूसरी तरफ लैलूंगा तहसील कार्यालय में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने पूरे राजस्व महकमे में हलचल मचा दी।
मामला तहसील कार्यालय लैलूंगा का है, जहां पदस्थ प्यून (चपरासी) अमिताभ मिंज कथित रूप से शराब के नशे में धुत पाया गया। बताया जा रहा है कि दिनांक 06/04/2026 को झगरपुर में सुशासन तिहार शिविर आयोजित था, जिसमें तहसील सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। शिविर समाप्त होने के बाद जब तहसीलदार उज्जवल पाण्डेय तहसील कार्यालय पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर नाराज हो उठे।
सूत्रों के मुताबिक कार्यालय में मौजूद चपरासी अमिताभ मिंज की हालत संदिग्ध दिखाई दी। बातचीत और व्यवहार से नशे की स्थिति प्रतीत होने पर तत्काल मेडिकल परीक्षण करवाया गया। मेडिकल रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद तहसीलदार ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि तहसीलदार द्वारा पूरे मामले की लिखित रिपोर्ट तैयार कर राजस्व अधिकारी लैलूंगा एसडीएम भरत कौशिक को निलंबन की कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में कर्मचारियों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई है।
“जनता परेशान… और बाबू-चपरासी नशे में?” ग्रामीणों ने पहले भी लगाए थे आरोप
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि स्थानीय ग्रामीणों ने भी लंबे समय से अमिताभ मिंज पर शराब के नशे में रहने के आरोप लगाए थे। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील कार्यालय आने वाले कई लोग पहले भी उसके व्यवहार से परेशान हो चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार कार्यालय में काम कराने पहुंचे लोगों को अव्यवस्थित माहौल का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालय अनुशासन का केंद्र होना चाहिए, लेकिन यदि वहां कर्मचारी ही नशे में मिलें तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर पहले शिकायतों के बावजूद निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या विभाग को पहले से इसकी जानकारी थी? अगर थी तो कार्रवाई देर से क्यों हुई?
तहसीलदार उज्जवल पाण्डेय ने क्या कहा?
तहसीलदार उज्जवल पाण्डेय ने पूरे मामले पर स्पष्ट शब्दों में कहा—
झगरपुर में सुशासन तिहार शिविर आयोजित किया गया था, जिसमें लैलूंगा ब्लॉक के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी व्यस्त थे। शिविर समाप्ति के पश्चात जब मैं तहसील कार्यालय पहुंचा तो चपरासी अमिताभ मिंज नशे की स्थिति में मिला। तत्काल उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरे द्वारा निलंबन की कार्रवाई हेतु प्रकरण एसडीएम सर को प्रेषित किया गया है।
तहसीलदार के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि प्रशासन इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
सुशासन तिहार के बीच शराबी कर्मचारी ने बिगाड़ी छवि
राज्य सरकार जहां गांव-गांव जाकर “सुशासन” का संदेश देने में जुटी हुई है, वहीं ऐसे मामलों ने प्रशासनिक छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी दफ्तरों में अनुशासन नहीं रहेगा तो जनता का भरोसा कमजोर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में कर्मचारियों का आचरण बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यहां आम जनता सीधे अपने जमीन, नामांतरण, सीमांकन और प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कामों के लिए पहुंचती है। ऐसे में यदि कर्मचारी शराब के नशे में पाए जाएं तो यह केवल व्यक्तिगत गलती नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की छवि पर असर डालने वाला मामला बन जाता है।
कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में मचा हड़कंप
सूत्रों के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई। कई कर्मचारी इस कार्रवाई को “सख्त संदेश” मान रहे हैं। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यदि प्रशासन इसी तरह अनुशासनात्मक कार्रवाई करता रहा तो सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार देखने को मिल सकता है।
अब निगाहें एसडीएम कार्यालय पर टिकी हुई हैं कि आगे इस मामले में क्या अंतिम कार्रवाई होती है। फिलहाल लैलूंगा तहसील में यह मामला चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।








