खरीफ सीजन में खाद की किल्लत से किसान परेशान : सरकारी समितियों में खाद का रोना, निजी दुकानदार और बिचौलियों से महंगे दामों पर खरीदने की मजबूरी, विभाग के छापे खानापूर्ति!

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0 ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष ने कालाबाजारी पर रोक लगाने प्रशासन से की मांग.


कोरबा/पाली:- खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण समय पर पाली विकासखण्ड क्षेत्र के किसान खाद संकट से जूझ रहे हैं। सरकारी समितियों में यूरिया- डीएपी समय पर नही मिल रही, और जो मिल भी रही है उसके लिए किसानों को जबरन जिंक और नैनो यूरिया खरीदना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि किसान मजबूरी में बिचौलियों या निजी दुकानदारों से दुगुने- तिगुने दाम पर कालाबाजारी का खाद खरीद रहे हैं।

क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सरकारी समितियों में स्टाफ द्वारा खाद खत्म है कहकर किसानों को वापस भेज दिया जाता है। लेकिन शाम होते ही वही खाद निजी दुकानों और बिचौलियों के पास महंगे दामों पर बिकने लगती है। लाइसेंसी दुकानदारों पर भी स्टॉक छिपाने का आरोप है। किसानों के कथनानुसार समितियों में खाद लेने जाओ तो समय पर खाद मिलना मुश्किल रहता है। वहीं अगर खाद उपलब्ध हो भी तो जिंक और नैनो यूरिया लेने दबाव बनाया जाता है। समितियों से समय पर खाद नही मिलने से उन्हें निजी दुकानदारों अथवा बिचौलियों से दुगुने दाम पर खाद खरीदना पड़ रहा है। सहकारी समितियों की मनमानी और बाजार में खाद की इस कालाबाजारी पर सवाल उठाते हुए ब्लाक कांग्रेस कमेटी पाली के अध्यक्ष सत्यनारायण पैकरा का कहना है कि खरीफ सीजन में किसानों के साथ धोखा हो रहा है। सरकारी खाद दर यूरिया 50 किलो- 266.50 एवं डीएपी 50 किलो- 1350 निर्धारित है। लेकिन ज्यादातर समितियों में खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर उसे मार्केट में कालाबाजारी दर 500 से 600 में यूरिया और 1800- 2000 में डीएपी बेंचा जा रहा है। किसानों को सरकारी दर पर खाद मिलना मुश्किल हो गया है। समितियों में रबी- खरीफ दोनों सीजन में स्टॉक नही रहता, खाद के साथ जिंक, नैनो यूरिया, कीटनाशक जबरन बेंचे जा रहे हैं, सरकारी खाद निजी दुकानों से दोगुने दाम पर मिल रहा है और विभाग के छापे व जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है। प्रशासन द्वारा खाद की कालाबाजारी रोकने कृषि विभाग की टीम लगाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि सिर्फ खानापूर्ति होती है। पैकरा ने आगे कहा- प्रशासन की निष्क्रियता और सरकारी समितियों- बिचौलियों के मध्य मिलीभगत के कारण अन्नदाताओं को लूट का शिकार होना पड़ रहा है। ऐसे में किसान सम्मान के नारे सिर्फ नारों में ही नजर आ रहे हैं, जमीनी स्तर पर किसानों को खाद खरीदी की आड़ में आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से तत्काल औचक निरीक्षण कर समितियों के स्टॉक की जांच और कालाबाजारी पर FCO एक्ट के तहत कार्रवाई किये जाने मांग की है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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