लैलूंगा, 04 अगस्त 2026।
ग्राम पंचायत लमडांड के आश्रित मोहल्ला नवामुड़ा, जो पंचायत मुख्यालय से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, में शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल की गई। राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक नन्द किशोर सतपथी के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष जनजागरण बैठक का उद्देश्य शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना तथा पूरे मोहल्ले को नशा मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लेना था।
जानकारी के अनुसार नवामुड़ा के छह बच्चे, जिनमें माध्यमिक शाला के 6 बच्चे एवं कक्षा 9वीं से 1बच्चा शामिल है, विद्यालय जाना छोड़ चुके थे। इन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने के उद्देश्य से सायं 7 बजे गांव में पालक जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी शाला त्यागी बच्चों एवं उनके अभिभावकों को आमंत्रित कर शिक्षा के महत्व, उज्ज्वल भविष्य तथा नियमित अध्ययन के लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रेरक संवाद और सामूहिक प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया तथा सभी बच्चों एवं उनके पालकों ने पुनः नियमित रूप से विद्यालय आने का संकल्प लिया। इस प्रकार शाला त्यागी बच्चों की मुख्यधारा में वापसी का प्रयास सफल एवं सार्थक सिद्ध हुआ।
बैठक में शिक्षा के साथ-साथ नशा मुक्ति के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई। उपस्थित पालकों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में पूरे नवामुड़ा मोहल्ले को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया तथा जनजागरण अभियान चलाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का निर्णय लिया।
बैठक में शाला विकास समिति के अध्यक्ष जोसफ बड़ा, सभी पालकगण, महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याएं, सहायक शिक्षक वेद प्रकाश डनसेना, माध्यमिक शाला के नायक सर एवं भारद्वाज सर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों के भविष्य एवं समाज के उज्ज्वल निर्माण के लिए इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक नन्द किशोर सतपथी ने कहा कि “कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालय, परिवार और समाज के संयुक्त प्रयास से ही प्रत्येक बच्चे का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है। शिक्षा और नशा मुक्ति दोनों ही एक समृद्ध एवं सशक्त समाज की आधारशिला हैं।”स्वयं सतपथी सर ने बच्चों को अगले दिन सुबह कॉपी पेन देकर उनके साथ 2 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल छोड़ा।
यह पहल शिक्षा के अधिकार, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।








