


गहिरा–बनेकेला–झगरपुर–मिलूपारा मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में थी। जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क और क्षतिग्रस्त पुल के कारण राहगीरों, ग्रामीणों, किसानों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
अक्सर हम देखते हैं कि सड़क की समस्या को लेकर लोग बड़े-बड़े आंदोलन करते हैं, चक्का जाम करते हैं और प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग करते हैं। आंदोलन अपनी जगह जरूरी हो सकता है, लेकिन अगर थोड़ी सी पहल, मेहनत और सहयोग से किसी खराब सड़क को चलने लायक बनाया जा सकता है, तो यह भी समाजसेवा का एक बड़ा उदाहरण है।
इसी सोच के साथ गहिराधाम के पुरोहित केयूरभूषण तिवारी महाराज एवं उनकी टीम ने सड़क की दयनीय स्थिति को देखते हुए बिना किसी दिखावे के तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया। गड्ढों को भरने और सड़क को आम लोगों के आवागमन के योग्य बनाने के लिए टीम ने स्वयं मेहनत की।
यह प्रयास केवल सड़क की मरम्मत नहीं है, बल्कि लोगों के प्रति जिम्मेदारी, सहयोग और सकारात्मक सोच का संदेश भी है।
जहां कोई समस्या देखकर केवल शिकायत करता है, वहीं कुछ लोग समाधान की दिशा में पहला कदम उठाते हैं। केयूरभूषण तिवारी महाराज एवं उनकी टीम की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय और अनुकरणीय है।
इस सराहनीय कार्य में केयूरभूषण तिवारी महाराज, पत्रकार रोहित चौहान, एवं कांति कुमार राठिया, अरुण कुमार तिवारी, राजेंद्र सारथी गिरधरगोपाल,का योगदान रहा।
सड़क किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की होती है।
समस्या पर आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन समाधान के लिए आगे बढ़ना उससे भी बड़ी बात है।
ऐसे सकारात्मक प्रयासों को सलाम।
मेहनत छोटी हो या बड़ी, अगर उससे आम लोगों का रास्ता आसान होता है तो वह समाज के लिए बहुत बड़ा योगदान है।







