
बिर्रा। अगर आप सोच रहे हैं कि सावन केवल बादलों के बरसने और शिवजी पर जल चढ़ाने का महीना है, तो ज़रा रुकिए! बिर्रा के सिंह मंगल भवन में केशरवानी महिला समिति ने ऐसा ‘सावन उत्सव’ रचाया कि इलाके का पारा अचानक से कई डिग्री ऊपर चढ़ गया। भक्ति का तड़का, प्रतियोगिता का रोमांच और फिर पुरस्कार बांटने का ऐसा सिलसिला चला कि भवन में मौजूद हर दूसरी महिला किसी न किसी ‘क्वीन’ के ताज से नवाज़ दी गई!

कार्यक्रम का आगाज़ तो भगवान कश्यप मुनि जी की पूजा-अर्चना और सावन के मधुर भजनों से हुआ, जिससे माहौल में थोड़ी देर के लिए आध्यात्मिक शांति छा गई। लेकिन इसके बाद जो शुरू हुआ, उसने शांति को सीधे किनारे लगा दिया। हरे रंग की एक समान साड़ियों में सोलह श्रृंगार करके पहुंचीं महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि सावन में हरियाली सिर्फ खेतों में नहीं, बल्कि मंगल भवन के रैंप पर भी पूरी शिद्दत से उतरती है।
असली ‘विस्फोट’ तो प्रतियोगिताओं के चरण में हुआ। म्यूजिकल चेयर और पहेली प्रतियोगिता में महिलाओं ने जो फुर्ती दिखाई, उसे देखकर लगा कि ओलिंपिक में इन खेलों को शामिल न करके भारी भूल की गई है।
लेकिन दिन का सबसे बड़ा ‘सस्पेंस थ्रिलर’ रहा—सावन सुंदरी प्रतियोगिता! सौंदर्य और योग्यता को परखने के सदियों पुराने पारंपरिक तरीकों को दरकिनार करते हुए, समिति ने निष्पक्षता का वो अनोखा मॉडल अपनाया जिसने बड़े-बड़े हुक्मरानों को सोच में डाल दिया—’चिट प्रणाली’ (लकी ड्रा)! जी हां, टैलेंट और वॉक को एक तरफ रख, पर्ची के भरोसे किस्मत का सिक्का उछाला गया। और जैसे ही डिब्बे से पर्ची निकली, किस्मत की बाज़ी मारते हुए रीता गुप्ता जी बन गईं ‘सावन सुंदरी’!
हैरानी की बात यह रही कि इसके बाद आयोजकों के पास पुरस्कारों का ऐसा असीम भंडार निकला कि कोई भी खाली हाथ लौटने को तैयार नहीं था। उपाधियों की इतनी अनोखी बौछार हुई कि लोग गिनती भूल गए:
* हरियाली क्वीन: रुचि गुप्ता
* शिव शक्ति क्वीन: दिव्या केशरवानी
* कजरी क्वीन: करुणा गुप्ता
* झूला क्वीन: श्रुति केशरवानी
हद तो तब हो गई जब गेम जीतने पर ममता केशरवानी, भजन पर निधि व मोनिका और डांस पर जिज्ञासा केशरवानी को ट्रॉफी थमा दी गई। ऐसा लग रहा था मानो समिति का एक ही मूल मंत्र था—”आए हो तो कोई न कोई क्वीन बनकर ही जाओगे!”
अंत में, स्वल्पाहार के समोसे-कचौड़ी चट करते हुए अध्यक्ष रुचि गुप्ता और सचिव दिव्या केशरवानी ने सभी का आभार जताया। कुल मिलाकर, बिर्रा का यह सावन उत्सव भक्ति, सौंदर्य और ‘सबको खुश करने वाले’ पुरस्कारों का ऐसा धमाकेदार कॉकटेल था, जिसकी चर्चा अगले सावन तक रुकने वाली नहीं है!








