
पोतरा पंचायत में मजदूरों की मजदूरी अटकी, सचिव-सरपंच की मनमानी के आरोप; महीनों से भुगतान का इंतजार!
पोतरा (लैलूंगा)। ग्राम पंचायत पोतरा में पंचायत के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत भवन की मरम्मत से लेकर अटल डिजिटल सेवा केन्द्र (चौपाल) में टाइल्स लगाने तक काम कराने के बाद संबंधित कारीगरों और मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिलने का आरोप सामने आया है। पीड़ितों का कहना है कि काम पूरा हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें भुगतान के लिए बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पंचायत भवन का काम पूरा, फिर भी भुगतान अटका!
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन में बिजली सुधार का काम इलेक्ट्रिशियन से कराया गया, वहीं खिड़की-दरवाजों की रिपेयरिंग के लिए वेल्डर से काम कराया गया। बताया जा रहा है कि इन कार्यों को पूरा हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संबंधित कारीगरों को अब तक भुगतान नहीं मिला है।
पीड़ितों का आरोप है कि भुगतान की मांग करने पर उन्हें लगातार आज-कल का आश्वासन देकर वापस लौटा दिया जाता है।
चौपाल में टाइल्स लगाने वाले मिस्त्री को 3 महीने से इंतजार
मामला यहीं खत्म नहीं होता। अटल डिजिटल सेवा केन्द्र (चौपाल) में टाइल्स लगाने वाले मिस्त्री का भुगतान भी कथित तौर पर तीन महीने से अधिक समय से लंबित है। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत से पंचायत का काम पूरा किया, लेकिन मेहनताना लेने के लिए उन्हें लगातार इंतजार करना पड़ रहा है।
‘साहब आज नहीं, कल भुगतान होगा’—कब आएगा मजदूरों का पैसा?
दिहाड़ी और कारीगरी से परिवार चलाने वाले मजदूरों के लिए कई सप्ताह या महीनों तक भुगतान अटका रहना गंभीर आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। पीड़ितों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च और परिवार की जरूरतों के बीच उन्हें अपने ही मेहनत के पैसे के लिए पंचायत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग तेज
मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए कार्यों, भुगतान प्रक्रिया, स्वीकृति और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उच्च अधिकारियों से मांग की गई है कि यदि भुगतान वास्तव में लंबित है तो जिम्मेदारी तय कर मजदूरों और कारीगरों का बकाया भुगतान शीघ्र कराया जाए।
सवाल बड़ा—काम मजदूर करें और भुगतान के लिए भी वही भटकें?
पोतरा पंचायत का यह मामला अब व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि पंचायत के कार्य पूरे कराने के बाद संबंधित मजदूरों और कारीगरों को समय पर भुगतान नहीं मिलता, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या पंचायत स्तर पर भुगतान प्रक्रिया में लापरवाही हो रही है या फिर कोई अन्य तकनीकी अथवा प्रशासनिक अड़चन है?
अब ग्रामीणों की निगाहें उच्च अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो पंचायत भवन और अटल डिजिटल सेवा केन्द्र में कराए गए कार्यों के भुगतान से जुड़े पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है और यह भी सामने आ सकता है कि मजदूरों का भुगतान आखिर क्यों अटका हुआ है।
नोट: सचिव और सरपंच पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित पंचायत पदाधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।








