तमता/पत्थलगांव
शासन-प्रशासन भले ही शिक्षा व्यवस्था सुधारने और आदिवासी अंचल के छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं देने के लंबे-चौड़े दावे करे, लेकिन पत्थलगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत तमता स्थित बालक छात्रावास की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां पिछले 8 वर्षों से वर्ग-2 (शिक्षक) के भरोसे छात्रावास अधीक्षक की पूरी जिम्मेदारी छोड़ दी गई है।
वर्ग-2 शिक्षक छात्रावास में, तो मरोल के स्कूल में बच्चों को कौन पढ़ाएगा?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस शिक्षक की नियुक्ति जशपुर जिले के ग्राम पंचायत मरोल के स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य संवारने के लिए वर्ग-2 के पद पर हुई थी, उन्हें अध्यापन कार्य से पूरी तरह अलग कर इतने सालों से गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई है?
मूल पद वर्ग-2 शिक्षक (ग्राम पंचायत मरोल, जशपुर जिला के स्कूल में कार्यरत)
वर्तमान प्रभार बालक छात्रावास तमता (अधीक्षक के रूप में 8 वर्षों से पदस्थ)
असर एक तरफ मूल शाला में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है, तो दूसरी तरफ छात्रावास प्रबंधन पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।
गंभीर आरोपों के बाद भी कार्रवाई शून्य, रसूख के आगे विभाग लाचार!
बीते दिनों इस छात्रावास और वर्तमान प्रभारी अधीक्षक बुधनाथ भगत की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद कोई ठोस कदम न उठाए जाने से स्थानीय निवासियों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभारी अधीक्षक की प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं से अच्छी साठगांठ व राजनीतिक पैठ है। इसी ‘रसूख’ के बल पर विभागीय अधिकारी उन पर कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहे हैं और नियमों को ताक पर रखकर उन्हें सालों से इस प्रभार पर बनाए रखा गया है।
पूर्णकालिक छात्रावास अधीक्षक की उठी मांग
ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि
तमता बालक छात्रावास में तत्काल प्रभाव से नियमित एवं पूर्णकालिक छात्रावास अधीक्षक की नियुक्ति की जाए।
वर्ग-2 के शिक्षक को उनके मूल पद (ग्राम पंचायत मरोल के स्कूल) में वापस भेजकर बच्चों के अध्यापन कार्य में लगाया जाए।
अधीक्षक पर लगे आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थाई अधीक्षक की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे बच्चों के भविष्य और अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।








