पृथ्वी पर बिजली-पानी की खपत की बहस के बीच गूगल का बड़ा दांव, सौर ऊर्जा से चलेगा पहला एआई डेटा सेंटर
धरती पर डेटा सेंटरों के फायदे और नुकसान को लेकर इन दिनों तीखी बहस छिड़ी हुई है। एक पक्ष का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की तरक्की के लिए डेटा जुटाना जरूरी है, इसलिए वह डेटा सेंटरों को जमीन और संसाधन उपलब्ध कराने के हक में है। वहीं दूसरा पक्ष प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, खासकर पानी की भारी खपत को लेकर चिंतित है। इसी बहस के बीच Google Space Data Center की योजना सामने आई है, जिसमें डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में स्थापित कर अक्षय ऊर्जा के सहारे लगातार चलाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि यह योजना इसी सप्ताह जमीन से उड़ान भरने वाली है।
कभी कल्पना मानी जाती थी, अब हकीकत बनने की ओर
इस प्रयोग को अंजाम देने वाली कंपनी अल्फाबेट की गूगल है। कुछ साल पहले तक जिस विचार को महज कोरी कल्पना समझा जाता था, गूगल अब उसे साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। करोड़ों डॉलर के इस अनुसंधान कार्यक्रम को सफलता मिली तो डेटा सेंटरों की जो होड़ अभी धरती पर दिख रही है, वह आने वाले वक्त में अंतरिक्ष तक पहुंच सकती है।
इस एक्सप्लेनर में जानिए
Google Space Data Center से जुड़े कई सवाल लोगों के मन में हैं। इस रिपोर्ट में समझिए कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर लगाने की गूगल की योजना आखिर क्या है, इसके लिए किस अभियान की शुरुआत होने जा रही है, मिशन की अब तक क्या तैयारियां पूरी हुई हैं और सफल रहने पर इसके क्या फायदे होंगे।
क्या है गूगल की प्रोजेक्ट सनकैचर योजना?
अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटर स्थापित करने की गूगल की इस योजना को ‘प्रोजेक्ट सनकैचर’ नाम दिया गया है। यह एक लंबी अवधि की शोध पहल है, जिसका लक्ष्य पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट, एलईओ) में सौर ऊर्जा से चलने वाले एआई डेटा सेंटर तैनात करना है, ताकि उन्हें अक्षय ऊर्जा से संचालित किया जा सके।
बिजली-पानी की बचत का दावा
अंतरिक्ष में लगभग हर समय सूर्य की रोशनी उपलब्ध रहती है। इसी वजह से माना जा रहा है कि Google Space Data Center जैसी व्यवस्था से धरती पर डेटा सेंटरों के कारण होने वाली भारी बिजली खपत, पानी की बर्बादी और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं से राहत मिल सकती है।






