बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही मां के लिए सरकारी योजनाएं बनीं सहारा, प्रसव के समय मिले 5 हजार और हर माह 1 हजार रुपये से मिल रही मदद
रायगढ़, 30 सितंबर 2026। पति की दुर्घटना में मृत्यु के बाद धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पुनर्वास लात निवासी लक्ष्मी राजपूत के सामने अपने बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले संभालने की चुनौती खड़ी हो गई। आर्थिक परिस्थितियों के बीच शासन की योजनाओं से मिलने वाली सहायता उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
प्रसव के समय मिली आर्थिक सहायता
लक्ष्मी राजपूत को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रसव के समय 5 हजार रुपये की सहायता मिली। यह राशि उनके लिए ऐसे समय में मददगार बनी, जब उन्हें अपने और बच्चे की जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
लक्ष्मी बताती हैं कि पति के निधन के बाद बच्चे की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई है। ऐसे में मातृ वंदना योजना के तहत मिली सहायता से उन्हें तत्काल जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक मदद मिली।
महतारी वंदन योजना से हर माह मिल रही सहायता
इसके साथ ही लक्ष्मी को महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि बच्चे के पालन-पोषण और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में उनके लिए सहारा बनी हुई है।
जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाया जा रहा योजनाओं का लाभ
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से पात्र महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य किया जा रहा है। योजनाओं का लाभ मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को परिवार की जिम्मेदारियां संभालने में सहायता मिल रही है।
लक्ष्मी राजपूत ने योजनाओं का लाभ मिलने पर शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पति के नहीं रहने के बाद बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी संभालना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता उन्हें इस जिम्मेदारी को निभाने में संबल दे रही है।






