प्यू के सर्वे में 35% लोगों ने माना- सोशल मीडिया से लोकतंत्र को नुकसान, भारत में 66% लोगों ने बताया फायदेमंद
नई दिल्ली। सोशल मीडिया आज सूचना और अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है, लेकिन लोकतंत्र पर इसके प्रभाव को लेकर दुनिया की राय एक जैसी नहीं है। प्यू रिसर्च सेंटर के 37 देशों में किए गए सर्वे में जहां बड़ी संख्या में लोगों ने सोशल मीडिया को लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए उपयोगी माना, वहीं एक बड़ा वर्ग इसे लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक भी मानता है।
सर्वे के मुताबिक, दुनियाभर में 35 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है, जबकि 55 प्रतिशत लोग इसे लोकतंत्र के लिए फायदेमंद मानते हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया लोगों को राजनीतिक मुद्दों की जानकारी हासिल करने और अपनी राय रखने का अवसर देता है।
भारत में सोशल मीडिया को लेकर नजरिया सकारात्मक
भारत में सोशल मीडिया और इंटरनेट के लोकतांत्रिक प्रभाव को लेकर लोगों का रुख कई विकसित देशों की तुलना में अधिक सकारात्मक दिखाई देता है। सर्वे में 66 प्रतिशत भारतीयों ने माना कि सोशल मीडिया या इंटरनेट से उन्हें ताजा घटनाओं की जानकारी मिलती है।
वहीं, 55 प्रतिशत लोगों ने इसे राजनीति में अपनी आवाज उठाने का माध्यम माना। हालांकि, इसके नकारात्मक पहलुओं को लेकर भी भारतीयों ने चिंता जताई है।
भारतीयों ने गिनाए सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान
सर्वे में भारतीयों की राय इस प्रकार सामने आई—
| सोशल मीडिया/इंटरनेट का असर | भारतीयों की राय |
|---|---|
| ताजा घटनाओं की जानकारी मिलती है | 66% |
| राजनीति में अपनी आवाज रखने का साधन | 55% |
| लोगों को गुमराह करना आसान होता है | 62% |
| राजनीतिक विचारों के आधार पर विभाजन बढ़ता है | 51% |
यानी भारत में बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया को सूचना और राजनीतिक भागीदारी का प्रभावी माध्यम मानते हैं, लेकिन साथ ही गलत सूचना और राजनीतिक ध्रुवीकरण को लेकर भी चिंता मौजूद है।
दक्षिण एशिया में सोशल मीडिया को लेकर ज्यादा सकारात्मक सोच
प्यू के आंकड़ों में भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में भी सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव को मानने वालों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।
| देश | लोकतंत्र पर नकारात्मक असर | सकारात्मक असर |
|---|---|---|
| भारत | 23% | 66% |
| पाकिस्तान | 33% | 62% |
| बांग्लादेश | 28% | 67% |
| श्रीलंका | 35% | 54% |
| जापान | 43% | 48% |
बांग्लादेश में 67 प्रतिशत लोगों ने सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक माना, जबकि पाकिस्तान में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत और श्रीलंका में 54 प्रतिशत रहा।
विकसित देशों में चिंता ज्यादा
सर्वे में अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में सोशल मीडिया के लोकतंत्र पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर ज्यादा चिंता दिखाई दी। इन देशों में आधे से अधिक लोगों ने सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक माना।
| देश | नकारात्मक असर | सकारात्मक असर |
|---|---|---|
| फ्रांस | 65% | 31% |
| अमेरिका | 64% | 34% |
| जर्मनी | 61% | 37% |
| ब्रिटेन | 56% | 41% |
| कनाडा | 55% | 40% |
अमेरिका में 64 प्रतिशत वयस्कों ने माना कि सोशल मीडिया लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है। फ्रांस में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत और जर्मनी में 61 प्रतिशत रहा।
सूचना और अभिव्यक्ति के साथ बढ़ी गलत सूचना की चिंता
सर्वे के आंकड़े सोशल मीडिया के दो अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। एक ओर यह लोगों को घटनाओं की जानकारी देता है, राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर देता है और नागरिक भागीदारी बढ़ा सकता है। दूसरी ओर गलत सूचना, लोगों को गुमराह करने और राजनीतिक विचारों के आधार पर समाज में विभाजन बढ़ने की चिंता भी सामने आती है।
इस तरह प्यू के सर्वे में सोशल मीडिया को लेकर दुनिया की राय स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंटी नजर आती है। खासकर विकसित देशों में जहां इसके नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता ज्यादा है, वहीं भारत समेत कई दक्षिण एशियाई देशों में लोग इसे लोकतांत्रिक भागीदारी और सूचना के लिहाज से अधिक उपयोगी मानते हैं।






