रायगढ़। ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक घरेलू जिम्मेदारियों के साथ खेती-किसानी और उद्यानिकी के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रही हैं। लैलूंगा विकासखंड के ग्राम राजपुर की भोजकुमारी पैकरा ने गेंदा फूल की खेती अपनाकर महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
पारंपरिक खेती से हटकर चुना फूलों की खेती का रास्ता
सतनसाय पैकरा के परिवार से जुड़ी भोजकुमारी पैकरा ने उद्यानिकी फसलों के साथ फूलों की खेती को भी अपनी आजीविका का माध्यम बनाने की पहल की है। उन्होंने गेंदा फूल की खेती शुरू कर पारंपरिक कृषि के साथ एक नए विकल्प को अपनाया है।
आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में किसान धान और अन्य पारंपरिक फसलों की खेती को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में भोजकुमारी का फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाना ग्रामीण कृषि में विविधता लाने का प्रयास है। गेंदा फूल की खेती स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर भी उपलब्ध करा सकती है।
महिला सशक्तिकरण को दे रही नई दिशा
भोजकुमारी पैकरा का प्रयास इस बात का उदाहरण है कि उचित अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर महिलाएं कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उनका यह कदम अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी पारंपरिक खेती के साथ नए कृषि विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
लैलूंगा क्षेत्र में भोजकुमारी जैसी मेहनतकश महिला कृषकों के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत हो सकती है। फूलों की खेती जैसे वैकल्पिक व्यवसाय महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।











