संकुल स्रोत समन्वयकों की कार्यशाला आयोजित

सीएसी की भूमिका और शिक्षण गुणवत्ता पर दिया गया जोर

पाठ्यक्रम और सह-पाठ्य गतिविधियों पर विशेष चर्चा

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संकुल स्रोत समन्वयकों की कार्यशाला आयोजित

सीएसी की भूमिका और शिक्षण गुणवत्ता पर दिया गया जोर

पाठ्यक्रम और सह-पाठ्य गतिविधियों पर विशेष चर्चा

रायगढ़, 15 जनवरी 2026/ कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश एवं जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.के.व्ही. राव के मार्गदर्शन में गढ़उमरिया स्थित स्कूल प्रांगण में रायगढ़ विकासखंड के सभी संकुल स्रोत समन्वयकों (सीएसी) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विकासखंड शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों में पूर्ण साक्षरता (एफएलएन) की प्राप्ति और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
           इस अवसर पर डीएमसी आलोक स्वर्णकार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजय पटेल, बीआरसीसी मनोज अग्रवाल और डाइट प्राध्यापक दुबे उपस्थित थे। कार्यशाला में शिक्षण प्रक्रिया की दक्षता, बच्चों का स्तरवार आकलन और टीएलएम एवं खेल के माध्यम से पढ़ाई को और अधिक प्रभावशाली बनाने पर गहन चर्चा हुई।
            डीएमसी आलोक स्वर्णकार ने कहा कि सीएसी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को बढ़ाने में अहम कड़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कक्षा अवलोकन के दौरान सीएसी का व्यवहार सरल, संतुलित और प्रेरक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएसी को बच्चों की वास्तविक स्थिति समझते हुए मार्गदर्शन देना चाहिए। यह केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि शिक्षा में सुधार का अवसर है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजय पटेल ने बताया कि एफएलएन का लक्ष्य 2027 तक पूरा करना प्राथमिकता है। इसके लिए प्रत्येक बच्चे की शब्द स्तर, वाक्य स्तर और अनुच्छेद स्तर पर स्थिति का रिकॉर्ड बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया टीएलएम, खेल और खोजपूर्ण विधियों के माध्यम से अधिक प्रभावशाली बनाई जानी चाहिए। बीआरसीसी मनोज अग्रवाल ने कहा कि सामाजिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, सीएसी अपने कर्तव्यों का पालन बेहतर रूप से करें। उन्होंने शिक्षक-विद्यार्थी विकास सूचकांक तैयार करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे प्रत्येक स्कूल में बच्चों की प्रगति का स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध होगा।

पाठ्यक्रम और सह-पाठ्य गतिविधियों पर विशेष चर्चा
कार्यशाला में शिक्षकों को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक स्कूल में एक घंटा ‘रीडिंग आवर’ के लिए नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही प्रार्थना सभा में बच्चों को मौखिक भाषा के विकास के लिए कविता और कहानी सुनाने, रचनात्मक लेखन, और एफएलएन किट के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाए। पूर्व माध्यमिक स्कूलों में बाल शोध मेला, विज्ञान कॉर्नर और मापन मेला जैसे गतिविधियों के आयोजन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह पहल बच्चों में रचनात्मक सोच, प्रयोगात्मक क्षमता और सीखने की रुचि विकसित करने में सहायक होगी।

समूह में सहभागिता और समन्वय
कार्यशाला में सीएसी रोहित कुमार सिदार, रविंद्र कुमार पटेल, सुशील कुमार चौहान, रविदास रात्रे सहित जिले के कई सीएसी उपस्थित रहे। सभी ने सक्रिय रूप से अपने अनुभव साझा किए और बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में साक्षरता और सीखने की क्षमता को बढ़ाना, शिक्षकों और सीएसी के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करना और प्रत्येक स्कूल में नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धति को लागू करना बताया गया।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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