लैलूंगा (रायगढ़)
आमजन की शिकायत का निवारण के लिए जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जाता है। छत्तीसगढ़ में सुशासन की सरकार ने इसे गंभीरता से लेकर शिविर स्थल में ही समस्या का निवारण किया जाना प्रशासन को निर्देशित किया है।
जनपद पंचायत लैलूंगा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर उस वक्त विवादों में घिरता नजर आ रहा है,आमजन के साथ जनप्रतिनिधियों व स्थानीय पत्रकारों को कार्यक्रम से पूरी तरह दूर रखा गया। हैरानी की बात यह रही कि न तो किसी प्रकार का निमंत्रण दिया गया और न ही सूचना साझा की गई, जिससे आमजन,जनप्रतिनिधियों व पत्रकारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह शिविर आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन पारदर्शिता का दावा करने वाले इस आयोजन में अनदेखी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जानबूझकर उन्हें दूर रखा गया, ताकि शिविर की वास्तविक स्थिति और व्यवस्थाओं की सच्चाई सामने न आ सके।
पत्रकारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, और इस तरह की उपेक्षा सीधे-सीधे सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
वहीं, जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या था जिसे जनता और मीडिया से छिपाने की कोशिश की गई?
क्या जनसमस्या निवारण शिविर अब “चुनिंदा लोगों” का कार्यक्रम बनकर रह गया है?
क्या पारदर्शिता के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है?
लैलूंगा में यह मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन बनने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।








