
देवभोग खुटगांव से सेमला होते हुए उड़ीसा सीमा को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग पिछले दो दशकों से बदहाली के आंसू बहा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का आरोप है कि पिछले 20 वर्षों में इस सड़क की एक बार भी सुध नहीं ली गई और न ही मरम्मत का कोई कार्य कराया गया है। इस कारण यह सड़क अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे हर दिन हादसों का अंदेशा बना रहता है।यह मार्ग क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन, स्कूली छात्र और उड़ीसा जाने-आने वाले यात्री गुजरते हैं। लंबे समय से देखरेख के अभाव में सड़क का डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और उसकी जगह बड़े-बड़े जानलेवा गड्डों ने ले ली है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि अब यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्डों के बीच सड़क बची है।दुर्घटनाओं का बना खतरा, राहगीर परेशान सड़क के अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने से आए दिन दोपहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे वाहनों के पलटने और गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई है। रात्रि के समय तो इस मार्ग से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है।ग्रामीणों ने बताया कि जर्जर सड़क के कारण सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस सेवा को होती है। गड्ढों के झटकों से मरीजों की स्थिति और बिगड़ जाती है।जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपेक्षा से आक्रोश स्थानीय निवासियों में शासन और लोक निर्माण विभाग के खिलाफ गहरा असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार पंचायत स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। 20 सालों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस मार्ग की सुध न लिया जाना प्रशासनिक लापरवाही और जन-प्रतिनिधियों की उपेक्षा को उजागर करता है।








