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लैलूंगा के पतरापारा प्राथमिक शाला की दुर्दशा: जर्जर भवन से तालीम का संघर्ष, किराये के प्रधानमंत्री आवास में चल रही पढ़ाई – शासन प्रशासन बेखबर!”

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लैलूंगा के पतरापारा प्राथमिक शाला की दुर्दशा: जर्जर भवन से तालीम का संघर्ष, किराये के प्रधानमंत्री आवास में चल रही पढ़ाई – शासन प्रशासन बेखबर!”


लैलूंगा/बिरसिंघा जनपद पंचायत लैलूंगा के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिरसिंघा के  पतरापारा की प्राथमिक शाला की हालत बदहाल हो चुकी है। यहां का स्कूल भवन वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ा है, जिसकी दीवारें दरक रही हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और बरसात में अंदर पानी टपकता है। ऐसे हालात में बच्चों को उस भवन में पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है। मजबूरन शिक्षक और ग्रामीण मिलकर बच्चों को पास के एक प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बने मकान में किराये पर पढ़ा रहे हैं।

यह दृश्य न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है। गांव के लोगों ने बताया कि पिछले कई सालों से भवन निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी केवल आश्वासन देकर चले जाते हैं।

खतरे में भविष्य, छत के नीचे डर
गांव वालों ने बताया कि जब स्कूल भवन की छत से ईंट और प्लास्टर गिरने लगे, तब अभिभावकों में डर बैठ गया कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए। शिक्षक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों की मांग पर स्कूल को अस्थायी रूप से एक प्रधानमंत्री आवास के मकान में शिफ्ट कर दिया गया, जहां किराया देकर पढ़ाई करवाई जा रही है। लेकिन वह मकान भी सुविधाओं से वंचित है – न पर्याप्त जगह है, न शौचालय, न खेलकूद की व्यवस्था।

“बच्चों की जान की कीमत नहीं समझते अफसर?”
गांव के एक अभिभावक ने आक्रोश जताते हुए कहा – “अगर यही हालत शहरों में होती, तो अब तक करोड़ों रुपये की फाइलें दौड़ चुकी होतीं। लेकिन यहां हमारे बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है। सब कागजों में बंद है, ज़मीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं।”

शिक्षकों की भी मजबूरी
शाला में पदस्थ शिक्षकों का कहना है कि वे भी रोज़ भय के साये में पढ़ाते हैं। भवन का कोई भरोसा नहीं कि कब गिर जाए। ऊपर से अब किराये के भवन में भी पढ़ाई करना पड़ रहा है, जिससे कई बार आसपास के लोगों की शिकायतें आती हैं और माहौल पढ़ाई के अनुकूल नहीं बन पाता।

विभागीय उदासीनता पर सवाल
जब इस संबंध में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग से बात की गई, तो एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल दी गई। कोई बजट न होने की बात कह रहा है, तो कोई प्रस्ताव लंबित होने का हवाला दे रहा है।

जनता का आक्रोश – “या तो भवन दो, या आंदोलन झेलो!”
अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। पतरापारा के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नया भवन स्वीकृत नहीं हुआ और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे जन आंदोलन करेंगे और स्कूल को ताला बंद कर पूरे मामले को मीडिया और उच्च अधिकारियों के समक्ष ले जाएंगे।


पतरापारा प्राथमिक शाला की हालत सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का आइना है जिसमें शिक्षा की बातें तो की जाती हैं, पर ज़मीनी स्तर पर बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा को लेकर गंभीरता नदारद है। अब सवाल यह है कि शासन-प्रशासन कब जागेगा? या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही ध्यान दिया जाएगा?

रिपोर्ट: प्रेस क्लब लैलूंगा
(जन सरोकार की निर्भीक आवाज़)

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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