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दुख की घड़ी में संवेदना और संबल बनकर सामने आए मनोज अग्रवाल, वन विभाग से दिलवाई तात्कालिक सहायता राशि

दुख की घड़ी में संवेदना और संबल बनकर सामने आए मनोज अग्रवाल, वन विभाग से दिलवाई तात्कालिक सहायता राशि

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा


अंगेकेला/लैलूंगा, 23 जुलाई 2025: ग्राम पंचायत मोहनपुर के आश्रित ग्राम अंगेकेला में बीते दिनों जंगली हाथियों के हमले में तीन ग्रामीणों की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। गांव में शोक और दहशत का माहौल है। ऐसे कठिन समय में जनसेवा को समर्पित और अजये योद्धा के नाम से पहचाने जाने वाले मनोज अग्रवाल ने मौके पर पहुँचकर न केवल शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की, बल्कि अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया।

वन विभाग से तात्कालिक सहायता राशि दिलाने में निभाई निर्णायक भूमिका

मनोज अग्रवाल ने संवेदना प्रकट करने के साथ ही पीड़ित परिवारों की तत्काल जरूरतों को समझा और वन विभाग से समन्वय कर तात्कालिक सहायता राशि दिलवाने की व्यवस्था करवाई। उन्होंने पीड़ित परिवार को इस दुख की घड़ी में अकेला न छोड़ते हुए प्रशासन पर सक्रियता के लिए दबाव डाला और खुद राहत कार्यों की निगरानी की।

रात में पहुँचकर की वन विभाग और ग्रामीणों के साथ गश्त

घटना की गंभीरता को समझते हुए मनोज अग्रवाल ने देर रात गाँव पहुँचकर वन अमले और ग्रामीणों के साथ स्वयं गश्त की। इस दौरान उन्होंने मौके पर लोगों से बात की और कहा कि,

> “जब तक हाथी आतंक का स्थायी समाधान नहीं होता, मैं हर क्षण ग्रामीणों के साथ खड़ा हूँ। यह सिर्फ संवेदना की बात नहीं, बल्कि जवाबदेही की घड़ी है।”





जागरूकता और प्रशिक्षण की बात

मनोज अग्रवाल ने यह भी कहा कि सिर्फ मुआवजा देने से समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों को हाथी हमलों से बचाव के लिए प्रशिक्षित करना होगा और वन विभाग को चेतावनी प्रणाली विकसित करनी चाहिए ताकि समय रहते लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।

ग्रामीणों में जगी उम्मीद की किरण

मनोज अग्रवाल की तत्परता और मानवीय पहल से ग्रामीणों में राहत की भावना जगी। ग्रामीणों ने कहा कि उनका आना केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि साहस और संबल का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि मनोज अग्रवाल की सक्रियता से प्रशासन भी जल्द हरकत में आएगा और ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सकेगा।


जहां एक ओर हाथी हमले से हुई मौतों ने पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल बना दिया है, वहीं दूसरी ओर मनोज अग्रवाल जैसे ज़मीनी जनसेवक के प्रयासों से एक नई उम्मीद और राहत की भावना ग्रामीणों में देखने को मिली। अब सबकी निगाहें प्रशासन और वन विभाग पर टिकी हैं कि वे इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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