भेड़ीमुड़ा (ब) में ‘मौत के साए’ में शिक्षा! जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवन में मासूमों की जिंदगी खतरे में

भेड़ीमुड़ा (ब) में ‘मौत के साए’ में शिक्षा! जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवन में मासूमों की जिंदगी खतरे में

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा


भेड़ीमुड़ा (ब), लैलूंगा विकासखंड, के
ग्राम पंचायत भेड़ीमुड़ा (ब) का प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र आज शिक्षा की दुर्दशा का जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। एक ओर सरकार स्कूल चलो अभियान चला रही है, दूसरी ओर यहां बच्चे जान हथेली पर रखकर रोज स्कूल आ रहे हैं। प्राथमिक शाला का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि उसकी दीवारों में दरारें ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े होल बन चुके हैं। छतें टपक रही हैं, फर्श उखड़ चुके हैं, और अंदर बैठने की कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है।

विद्यालय में कोई बैठने के लिए जगह नाहि है। बल्कि बगल में पृथक सेट में संचालित किया जा रहा है।  जिसमें कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक के सभी बच्चों को एकसाथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। बरसात के दिनों में पानी सीधे बच्चों के ऊपर टपकता है। बच्चों के बैठने के लिए बेंच नहीं, जमीन तक सूखी नहीं। जब शिक्षक खुद डरते हुए पढ़ा रहे हैं, तो सोचिए मासूम बच्चों पर क्या गुजरती होगी?

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह विद्यालय  पूरी तरह जर्जर है बगल में बने’पृथक सेट’ में स्कूल को संचालित किया जा रहा है। लेकिन यह भवन भी अब जानलेवा साबित हो रहा है। भवन की हालत देखकर किसी का भी दिल दहल जाए — दीवारों में ऐसे-ऐसे छेद हैं, मानो कब गिर पड़े कहा नहीं जा सकता। स्थानीय लोग कहते हैं, “रोज डर बना रहता है कि कहीं दीवार ढह न जाए, लेकिन बच्चों को मजबूरी में वहां भेजना पड़ता है।”

इतना ही नहीं, पंचायत का आंगनबाड़ी केंद्र भी इसी हाल में है। भवन इतना जर्जर है कि बच्चे आ तो जाते हैं, लेकिन बैठने की जगह नहीं है। बरसात में चारों ओर पानी भर जाता है। भवन के अंदर सीलन, बदबू और अंधेरा रहता है। कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि इतनी हिम्मत नहीं करता कि अंदर 10 मिनट भी टिक सके। लेकिन मासूम बच्चों को दिनभर उसी में रखा जाता है, जो सीधे-सीधे उनके जीवन से खिलवाड़ है।

स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ फाइलें घूम रही हैं। शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधि और प्रशासन – सभी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। यह खामोशी अब ग्रामीणों की असहनीय होती जा रही है।

ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल इस स्कूल और आंगनबाड़ी के भवन का नवीनीकरण किया जाए या नया भवन स्वीकृत कर निर्माण शुरू किया जाए। बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा जब शिक्षा सुरक्षित होगी। भेड़ीमुड़ा (ब) के मासूमों को भी एक सुरक्षित स्कूल और स्वच्छ आंगनबाड़ी केंद्र का हक है।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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