


लैलूंगा में जमीन घोटाले ने मचाई सनसनी: पैतृक जमीन बेचने के बाद भी नहीं मिला पैसा, दो व्यापारियों पर लगा गंभीर आरोप

रायगढ़। लैलूंगा क्षेत्र में जमीन के नाम पर हुए ताजा घोटाले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। ग्राम कुंजारा और केसला के ग्रामीण आज भी न्याय की आस में भटक रहे हैं। दरअसल, श्रीमती मनमेत महंत और श्यामदास महंत ने अपनी पैतृक जमीन बेच तो दी, लेकिन खरीददारों ने उन्हें अब तक भुगतान नहीं किया। इस पूरे मामले में स्थानीय व्यापारी कन्हैयालाल अग्रवाल (55 वर्ष) और डमरुधर यादव (43 वर्ष) पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने चालाकी से जमीन अपने नाम करा ली और बाद में चेक को ‘होल्ड’ करवा दिया।
पीड़ित परिवार ने बताया कि दोनों आरोपियों ने जमीन सौदे के दौरान भरोसे का हवाला देकर उन्हें झांसे में लिया। तय सौदे के मुताबिक, मुकडेगा तहसील, जिला रायगढ़ में स्थित जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की गई। रजिस्ट्री ऑफिस में खरीदारों ने यह विश्वास दिलाया कि भुगतान चेक के माध्यम से सुरक्षित रहेगा और कभी भी निकाला जा सकेगा। पीड़ितों को लगा कि सब कुछ पारदर्शी और वैधानिक तरीके से हो रहा है, इसलिए उन्होंने बिना संदेह सौदा पूरा कर दिया।
लेकिन जब रजिस्ट्री की प्रक्रिया खत्म हुई और विक्रेताओं ने चेक बैंक में जमा किया, तो वहां जाकर उनका भरोसा चकनाचूर हो गया। बैंक अधिकारियों ने बताया कि संबंधित चेक पर ‘होल्ड’ लगा दिया गया है और भुगतान नहीं हो सकता। यह सुनते ही पीड़ित परिवार के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत थाना लैलूंगा पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में कहा गया है कि यह कोई सामान्य लेनदेन की गलती नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित धोखाधड़ी है। पीड़ितों का आरोप है कि दोनों आरोपियों ने पहले से ही यह साजिश रची थी कि जमीन अपने नाम कराने के बाद भुगतान रोक दिया जाए। अब जमीन उनके नाम पर हो चुकी है, लेकिन विक्रेताओं को एक भी रुपया नहीं मिला।
ग्रामीणों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से लोगों का भरोसा कानूनी और रजिस्ट्री प्रक्रिया पर से उठने लगा है। कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कन्हैयालाल अग्रवाल और डमरुधर यादव पर तत्काल धोखाधड़ी की धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई हो, ताकि अन्य निर्दोष लोग ऐसे फर्जीवाड़े का शिकार न बनें।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर ली है और प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि सभी दस्तावेजों और बैंक रेकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके। वहीं, ग्रामीणों में गुस्से का माहौल बना हुआ है और वे लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
लैलूंगा क्षेत्र में यह पहला मौका नहीं है जब जमीन के नाम पर ऐसा घोटाला सामने आया हो। इससे पहले भी कुछ मामलों में लोगों को रजिस्ट्री के बाद भुगतान से वंचित कर दिया गया था। यह ताजा घटना फिर एक बार यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर प्रशासन ऐसे जमीन माफियाओं पर लगाम क्यों नहीं कस पा रहा है?
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्याय की लड़ाई उच्च अधिकारियों और न्यायालय तक ले जाएंगे। अब देखना यह है कि क्या पुलिस इस सनसनीखेज धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर पीड़ितों को न्याय दिला पाएगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।







