बाकारुमा रेंज में बीट गार्ड के संरक्षण में जंगलों की खुली लूट, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, बीट गार्ड ने कहा… पढ़िए पूरी खबर!

बाकारुमा रेंज में बीट गार्ड के संरक्षण में जंगलों की खुली लूट, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, बीट गार्ड ने कहा… पढ़िए पूरी खबर!


धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत बाकारुमा वन परिक्षेत्र एक बार फिर अवैध जंगल कटाई को लेकर सुर्खियों में है। वन अधिकार पट्टे की आड़ में बड़े पैमाने पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई किए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ एवं बाकारुमा रेंजर को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बता दें,ग्रामीणों ने अपने पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि बाकारुमा वनपरिक्षेत्र में पदस्थ बीट गार्ड समीर तिर्की के संरक्षण में जंगलों पर अवैध कब्जा, लकड़ी की कटाई, चिराई और खुलेआम बिक्री का गोरखधंधा चल रहा है। शिकायत कागज में उल्लेख किया गया है कि चिरोडीह बीट अंतर्गत आने वाले जंगलों पर गेल्हापानी, थोलापारा, खूटसराई, पीठापानी एवं सेनाआमा ग्राम के एक विशेष समाज के लोगों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से कब्जा कराया गया है। और वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि बीते कुछ वर्षों में न केवल हरे-भरे जंगल काटे गए, बल्कि कब्जाई गई वनभूमि पर जेसीबी मशीन लगवाकर खेती योग्य जमीन तैयार कराई गई—वह भी कथित तौर पर बीट गार्ड की जानकारी और संरक्षण में।

वहीं हैरानी की बात यह है कि जो ग्रामीण पिछले 50 वर्षों से जंगल पर आश्रित रहे हैं, उन्हें जंगल में प्रवेश, सूखी लकड़ी, महुआ, तेंदूपत्ता जैसे परंपरागत वनोपज संग्रह से भी रोका जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बीट गार्ड द्वारा पुराने कब्जाधारियों पर सख्ती दिखाई जाती है, जबकि कथित रूप से मोटे लेन-देन के बाद जंगलों को अपने समाज के लोगों के हवाले कर दिया गया है। स्थिति यह है कि अब जंगल में काबिज लोग बाहरी ग्रामीणों को घुसने तक नहीं दे रहे, जबकि अंदर ही अंदर जंगल का सफाया लगातार जारी है।

वहीं मामले को लेकर हमने जब इस संबंध में बीट गार्ड समीर तिर्की से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने दोनों पक्षों के बीच विवाद का हवाला देते हुए स्वयं को विवश बताया। उनका कहना था कि एक पक्ष को रोकने पर दूसरा पक्ष जंगल काटने लगता है और यह विवाद पूर्व में भी शिकायतों के बाद निपटाया जा चुका है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब जंगलों की रखवाली की जिम्मेदारी वन विभाग और बीट गार्ड की है, तो फिर सैकड़ों पेड़-पौधे कटे कैसे?क्या विभागीय अधिकारी मौके पर निरीक्षण नहीं करते?या फिर सब कुछ जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?

बहरहाल, बाकारुमा वन परिक्षेत्र लगातार जंगल कटाई के मामलों को लेकर विवादों में रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां वनरक्षक ही वनभक्षक बन बैठे हैं, और उनकी कार्यशैली ने पूरे वन विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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