महीनों से बंद बरटोली आंगनबाड़ी मासूमों का भविष्य अंधेरे में, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
लैलूंगा। मुकडेगा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत ढोरोंवीजा के बरटोली में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है। न दरवाजे खुल रहे हैं, न बच्चों की किलकारियां सुनाई दे रही हैं। गांव के मासूम बच्चे पोषण आहार और प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया हुआ नजर आ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने ससुराल में रह रही हैं और सहायिका मातृत्व अवकाश पर है। ऐसे में केंद्र पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। सवाल यह है कि जब दोनों कर्मी अनुपस्थित हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों के खेलने या बैठने की जगह नहीं होता, बल्कि यह कुपोषण से लड़ाई का सबसे अहम मोर्चा है। यहां बच्चों को पूरक पोषण आहार, टीकाकरण, प्री-स्कूल शिक्षा और गर्भवती महिलाओं को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं। लेकिन बरटोली में इन सब सुविधाओं पर ताला लटका हुआ है। नन्हें बच्चे धूल-मिट्टी में खेलने को मजबूर हैं और माताएं परेशान हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों को मौखिक सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बरटोली जैसे छोटे गांव में आंगनबाड़ी का बंद होना सीधे-सीधे शासन की योजनाओं पर सवाल खड़ा करता है। क्या यही है “पोषण अभियान” और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का जमीनी सच?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि महीनों से केंद्र बंद होने के बावजूद किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण तक नहीं किया। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो बच्चों का शैक्षणिक और शारीरिक विकास बुरी तरह प्रभावित होगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक कार्यकर्ता की नियुक्ति की जाए और केंद्र को नियमित रूप से संचालित किया जाए। साथ ही, जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब जागता है और बरटोली के मासूमों के भविष्य को अंधेरे से बाहर निकालता है। फिलहाल तो सवाल यही है — आखिर कब खुलेगा बरटोली आंगनबाड़ी का ताला?








