

जनपद बैठक बनी मज़ाक! नहर–पानी संकट पर चर्चा से पहले ही गायब रहे जिम्मेदार अधिकारी, विधायक का फूटा गुस्सा

रिपोर्ट ~ हीरालाल राठिया लैलूंगा
लैलूंगा। भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही क्षेत्र में जल संकट गहराने की आशंका को लेकर लैलूंगा जनपद पंचायत में आयोजित सामान्य सभा की बैठक उस वक्त हंगामेदार बन गई, जब सबसे अहम मुद्दे पर चर्चा से पहले ही जिम्मेदार विभागों के अधिकारी नदारद पाए गए। बैठक में लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, जनपद अध्यक्ष ज्योति भगत, क्षेत्र के सक्रिय चेहरा अजेय योद्धा मनोज अग्रवाल, जनपद सदस्यगण एवं जनपद सीईओ प्रीति नायडू मौजूद थे।
बैठक का मुख्य एजेंडा लैलूंगा नहर की स्थिति और गर्मी के मौसम में संभावित जल संकट को लेकर ठोस रणनीति बनाना था। लेकिन जैसे ही चर्चा शुरू होने वाली थी, यह खुलासा हुआ कि न तो पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के अधिकारी उपस्थित हैं और न ही वन विभाग के प्रतिनिधि। यह जानकारी मिलते ही बैठक का माहौल गरमा गया और जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बताया।
विधायक विद्यावती सिदार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि जब जनता पानी के लिए परेशान हो रही है, तब संबंधित विभागों के अधिकारियों का इस तरह गैरहाजिर रहना बेहद गंभीर और गैरजिम्मेदाराना है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिना जिम्मेदार अधिकारियों के कैसे कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है।
जनपद अध्यक्ष ज्योति भगत और अन्य सदस्यों ने भी इस लापरवाही पर आक्रोश जताया। सदस्यों का कहना था कि हर साल गर्मी के समय पानी की समस्या सामने आती है, लेकिन विभागीय समन्वय की कमी के कारण हालात जस के तस बने रहते हैं। नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, हैंडपंप सूख जाते हैं और ग्रामीणों को दूर-दूर तक भटकना पड़ता है।
बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी केवल कागजों में योजनाएं बनाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आता। ऐसे में जब समीक्षा बैठक बुलाई जाती है, तो अधिकारी गायब रहकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं।
स्थिति को देखते हुए विधायक ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को नोटिस जारी करने और अगली बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश देने की बात कही। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लैलूंगा क्षेत्र में जल संकट का मुद्दा हर साल विकराल रूप लेता जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। इस बैठक ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक जनता को राहत मिलना मुश्किल है।
अब देखना यह होगा कि विधायक की नाराजगी और सख्त रुख के बाद प्रशासन कितनी जल्दी हरकत में आता है या फिर यह मामला भी अन्य बैठकों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।







