लैलूंगा।
चिंगारी राम कथा का तीसरा दिन गुरुवार को भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया, जब गहिरा आश्रम की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री ने भगवान श्रीराम की अद्भुत बाल लीलाओं का जीवंत वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या के महाराज दशरथ और माता कौशल्या के यहां हुआ था। श्रीराम का रूप इतना मनोहारी था कि उन्हें देखते ही हर किसी का मन मोहित हो जाता था। अपने माता-पिता के स्नेह में श्रीराम बाल स्वरूप में पवित्र लीलाएं करते थे।
जब एक साथ दो जगह दिखे बाल रूप श्रीराम… कांप उठीं माता कौशल्या!
कथा के दौरान सुनाई गई बाललीला ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। एक प्रसंग में बताया गया कि माता कौशल्या ने श्रीराम को स्नान कराकर झूले में सुलाया और स्वयं पूजा में लीन हो गईं। जब वे पूजा स्थल पर लौटीं तो देखा कि देवताओं को अर्पित नैवेद्य को स्वयं बालक राम ग्रहण कर रहे हैं।
हैरान माता जब झूले के पास पहुंचीं, तो वहां भी श्रीराम को गहरी नींद में पाया। यह अद्भुत दृश्य देखकर माता कौशल्या भयभीत हो गईं और कांपने लगीं। तभी भगवान श्रीराम ने उन्हें अपना विराट रूप दिखाया—एक-एक रोम में करोड़ों ब्रह्मांड समाए हुए! यह दिव्य दृश्य देखकर माता कौशल्या भावविभोर होकर प्रभु के चरणों में गिर पड़ीं।
भक्ति में डूबा पूरा माहौल, भजनों ने बांधा समां
राम कथा के दौरान संगीतमय भजन टीम ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कथा स्थल पर उमड़ रही है। साथ ही प्रतिदिन पूजन, आरती, प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन भी पूरे उत्साह के साथ जारी है।
युवाओं का बड़ा संकल्प—नशामुक्त और संस्कारी समाज की ओर कदम
कथा समापन के दौरान गांव के युवा सरपंच पोथीराम सिदार के नेतृत्व में युवाओं ने व्यासपीठ पर कथा से प्रेरित होकर बड़ा संकल्प लिया। उन्होंने गांव के विकास, नशामुक्त समाज निर्माण, आदिवासी समाज की कुरीतियों को समाप्त करने, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और भगवान राम के आदर्शों पर चलकर मर्यादित जीवन जीने का प्रण लिया।
संदेश साफ है:
अब लैलूंगा सिर्फ कथा नहीं सुन रहा… बल्कि राम के आदर्शों को जीवन में उतारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।








