लैलूंगा। जनपद पंचायत में विकास कार्यों को पटरी पर लाने के लिए अब प्रशासन ने बड़ा दांव खेल दिया है। निर्माण कार्यों और आवास योजनाओं की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवालों के बीच, समीक्षा और मार्गदर्शन की “ताबड़तोड़ रणनीति” लागू की जा रही है।
शुरुआत में जहां सिर्फ 15 पंचायतों को समीक्षा के लिए बुलाया गया था, वहीं बैठक में उठी मांग और जमीनी हकीकत को देखते हुए अब सीधे 75 पंचायतों की समीक्षा करने का फैसला लिया गया है। यानी अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आधे-अधूरे आंकड़ों से नहीं, बल्कि ग्राउंड लेवल की पूरी पड़ताल के बाद ही विकास की गाड़ी आगे बढ़ेगी।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कई पंचायतों की धीमी प्रगति, अधूरे निर्माण कार्य और आवास योजनाओं की लचर स्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए। इसके बाद अधिकारियों ने क्लस्टर वार समीक्षा का नया फॉर्मूला अपनाने का निर्णय लिया, जिससे हर क्षेत्र की समस्याओं को अलग-अलग समझकर समाधान निकाला जा सके।
अब प्रशासन का दावा है कि इस क्लस्टर मॉडल के जरिए न सिर्फ निगरानी मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों में जवाबदेही भी तय होगी। हालांकि, बड़ा सवाल यही है कि क्या ये “समीक्षा का तूफान” वाकई जमीनी बदलाव लाएगा, या फिर कागजों में ही विकास की कहानी लिखी जाती रहेगी?
फिलहाल जनता की नजरें टिकी हैं—क्या बैठकों से निकलेगा विकास, या फिर ये भी बनकर रह जाएगी सिर्फ एक और औपचारिकता?








