बम्हनीडीह ब्लॉक के याचिकाकर्ताओ ने संचालनालय में सौंपा ज्ञापन



शासन पर नहीं आएगा कोई आकस्मिक आर्थिक बोझ

सेवानिवृत्ति चरणों में होगी, तो उसका आर्थिक प्रभाव भी किस्तों में होगा।

माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर के निर्णय अनुसार संविलियन पूर्व की सेवा गणना कर “पूर्ण पेंशन” प्रदान करने हेतु नीति निर्धारण एवं आदेश जारी करने की मांग

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी, बम्हनीडीह ब्लॉक अध्यक्ष उमेश तेम्बुलकर के नेतृत्व में रामलाल डडसेना, शिव पटेल , डिलेश्वर डडसेना, रमेश कुमार बरेठ, संतोष कुमार रजक, महेश राम खैरवार, सनत कुमार सिदार, पीताम्बर साहू, भीम सिंह खैरवार, उत्तम लाल साहू, उमेश कुमार दुबे, फिरतराम कँवर, अंतु राम उराँव, प्रताप सिंह कँवर, गोपाल प्रसाद जायसवाल, रविशंकर कुम्हार, शशि किरण चौबे, श्रीमती अर्चना डडसेना, ताराचंद पाण्डेय, द्वारा हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा।



कमल प्रीत सिंह सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, अशोक नारायण बंजारा उप संचालक , डॉ महेश नायक उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन सौंप कर न्यायालयीन निर्णय अनुसार पूर्व सेवा से पेंशन देने का मांग पत्र सौंपा गया।

सौंपे गए ज्ञापन में मांग किया गया है कि
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रमेश चंद्रवंशी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य WPS  2930/2021 दिनांक 23/01/2026 पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक निर्णय पारित किया है, जिसमें माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी उपाय है। याचिकाकर्ताओं द्वारा संविलियन (01.07.2018) से पूर्व दी गई लंबी सेवा को अप्रासंगिक मानकर शून्य नहीं किया जा सकता।

*न्यायसंगतता और प्रशासनिक तर्कसंगतता:*

माननीय न्यायालय के अनुसार, यदि केवल संविलियन तिथि से 10 वर्ष की गणना की जाती है, तो शिक्षक वर्ष 2028 के बाद ही पात्र हो पाएंगे, जबकि वे पहले ही राज्य के नियंत्रण में एक दशक से अधिक सेवा दे चुके हैं। यह न्यायसंगतता, अनुपातिकता और प्रशासनिक तर्कसंगतता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।


*सेवा की निरंतरता की गणना (प्रथम नियुक्ति तिथि से)*

हमारी प्रमुख मांग है कि प्रथम नियुक्ति तिथि (शिक्षाकर्मी/पंचायत संवर्ग के रूप में पदभार ग्रहण करने की तिथि) से कुल सेवा की गणना की जाए। इससे उन शिक्षकों को भी पेंशन का लाभ मिल सकेगा जो 10 वर्ष की ‘अर्हक सेवा’ की तकनीकी बाध्यता के कारण रिक्त हाथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

*संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नीति निर्धारण*

माननीय न्यायालय ने निर्देश दिया है कि शासन सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति, प्रशासनिक नियंत्रण और संवैधानिक सिद्धांतों (भेदभाव-निषेध और समानुपातिकता) को ध्यान में रखते हुए 120 दिनों के भीतर एक सचेत और कारणयुक्त स्पीकिंग आदेश जारी करे।

सिंगल बैंच के निर्णय के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा डबल बैंच में WA 325/2026 याचिका दायर की गई थी जिसे माननीय उच्च न्यायालय के डबल बैंच द्वारा दिनांक 23/04/2026 को खारिज करते हुए सिंगल बैंच के निर्णय को सही माना है।      

एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति एवं क्रमिक वित्तीय प्रबंधन-
प्रदेश में कार्यरत लगभग 1.40 लाख एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति एक क्रमिक प्रक्रिया है। सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष औसतन 2,000 से 3,000 शिक्षक ही सेवानिवृत्त होंगे। इस क्रमिक प्रवाह के कारण राज्य शासन पर एकमुश्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, जिससे बजट प्रबंधन में सुगमता बनी रहेगी।

शासन पर कोई आकस्मिक आर्थिक बोझ नहीं आएगा, यह क्रमिक प्रक्रिया राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।

जब सेवानिवृत्ति चरणों में होगी, तो उसका आर्थिक प्रभाव भी किस्तों में होगा। अतः शासन के लिए एल.बी. संवर्ग की मांगों का वित्तीय प्रबंधन पूर्णतः व्यावहारिक और संभव है।

प्रदेश के शिक्षक संवर्ग ने सदैव शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा है। अतः माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए पूर्व सेवा गणना के आधार पर पूर्ण पेंशन” प्रदान करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया जावे

बिलासपुर संभाग हेड
बिलासपुर संभाग हेड
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