
तमता (पत्थलगांव)। तमता क्षेत्र के बालक छात्रावास में नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय युवाओं का आरोप है कि छात्रावास के अधीक्षक बुध नाथ भगत द्वारा स्टीफन खलखो नामक व्यक्ति जो वर्तमान में छात्रावास में चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत हैं और उनसे कथित रूप से ₹1 लाख लेकर छात्रावास में नियम विरुद्ध नियुक्ति कराई गई। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति दूसरे पंचायत क्षेत्र का निवासी है, जबकि स्थानीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा एवं युवतियां रोजगार के अवसर का इंतजार कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियुक्ति वास्तव में बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन, निर्धारित प्रक्रिया और पंचायत प्रस्ताव के की गई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि छात्रावास में पदों की नियुक्ति के लिए क्या निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी और चयन के लिए किन नियमों का पालन किया गया।
कन्या छात्रावास में भी नियुक्ति को लेकर सवाल
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आया है कि तमता स्थित कन्या छात्रावास में भी महिला कर्मी हेमू अजगले को भी पूर्व में इसी तरह नियुक्तियां किए जाने की शिकायतें हैं। आरोप है कि इन नियुक्तियों के लिए न तो पदों का विधिवत विज्ञापन जारी किया गया और न ही पंचायत स्तर पर प्रस्ताव लिए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अधीक्षक पर पहले भी आरोप लगने की चर्चा
स्थानीय लोगों का दावा है कि छात्रावास के अधीक्षक बुध नाथ भगत से जुड़ा यह नियुक्ति संबंधी दूसरा मामला है, जिसमें पैसे लेकर नौकरी दिलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि बिना निर्धारित प्रक्रिया के नियुक्तियां हुई हैं, तो इसमें केवल एक व्यक्ति की भूमिका नहीं हो सकती। हालांकि अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों की भी स्वतंत्र जांच के बाद ही पुष्टि हो सकती है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
स्थानीय युवाओं ने मांग की है कि बालक एवं कन्या छात्रावास में पिछले कुछ वर्षों में हुई सभी नियुक्तियों की जांच कराई जाए। नियुक्ति प्रक्रिया, विज्ञापन, चयन सूची, पंचायत प्रस्ताव, भुगतान संबंधी दस्तावेज और संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियुक्तियां नियमों के अनुसार हुई हैं या नहीं।
समाचार लिखे जाने तक लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधीक्षक एवं विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।








