
कागजों में नियम, जमीन पर धड़ल्ले से कारोबार—प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
लैलूंगा। नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर संचालित होने की चर्चा है, जिनकी मान्यता और वैधता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बिना आवश्यक मान्यता अथवा अधिकृत अनुमति के कई संस्थान धड़ल्ले से विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा और विभिन्न प्रकार के कोर्स कराने में जुटे हैं।
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ या सिर्फ कमाई का खेल?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि इन संस्थानों के पास संबंधित विभाग की आवश्यक मान्यता नहीं है, तो आखिर ये संस्थान किस आधार पर विद्यार्थियों का प्रवेश ले रहे हैं और प्रमाणपत्र अथवा कोर्स पूरा करने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग ने इन कंप्यूटर सेंटरों की कभी जांच की है? यदि जांच हुई है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जांच नहीं हुई, तो इतने समय से बिना सत्यापन के ऐसे संस्थान कैसे संचालित हो रहे हैं?
प्रशासन मौन, जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर सवाल
लैलूंगा में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के नाम पर संचालित होने वाले इन संस्थानों की मान्यता, पंजीयन, पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की मांग उठ रही है। अभिभावकों और विद्यार्थियों का कहना है कि किसी संस्थान में फीस जमा करने से पहले उसकी मान्यता और प्रमाणपत्र की वैधता स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।
जांच हुई तो सामने आ सकता है बड़ा खेल!
यदि प्रशासन द्वारा लैलूंगा क्षेत्र के सभी निजी कंप्यूटर एजुकेशन सेंटरों की मान्यता, पंजीयन, संचालक की अनुमति, पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों को दिए जा रहे प्रमाणपत्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी कंप्यूटर सेंटरों का सत्यापन कराया जाए और यदि कोई संस्था बिना वैध अनुमति या मान्यता के संचालित पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल सीधा है—लैलूंगा में चल रहे कंप्यूटर सेंटरों की मान्यता की जांच आखिर कब होगी?
क्या प्रशासन कार्रवाई करेगा या फिर जिम्मेदारों की चुप्पी यूं ही बनी रहेगी?







