





लैलूंगा थाना स्टाफ के लिए आवास की बदहाली: टपकती छत, जर्जर भवन और खंडहरनुमा कमरों में रहने की मजबूरी!

लैलूंगा। आम जनता की सुरक्षा में दिन-रात ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए लैलूंगा में बेहतर आवासीय व्यवस्था का सवाल अब गंभीर होता नजर आ रहा है। आरोप है कि थाना स्टाफ को रहने के लिए उपलब्ध कराए गए कई कमरे और भवन बेहद जर्जर हालत में हैं। कहीं छत से पानी टपकता है तो कहीं भवन की हालत देखकर ही उसकी उम्र और बदहाली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बारिश के मौसम में समस्या और भी बढ़ जाती है। जर्जर छतों से पानी रिसने और कमरों में नमी की वजह से पुलिसकर्मियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिस पुलिस स्टाफ पर क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही खुद सुरक्षित और बेहतर आवास के लिए जूझता नजर आ रहा है।
टपकती छत के नीचे ड्यूटी के बाद आराम या मजबूरी?
पुलिसकर्मियों से हर मौसम में चौबीसों घंटे ड्यूटी की उम्मीद की जाती है। लेकिन यदि ड्यूटी से लौटने के बाद उन्हें आराम के लिए सुरक्षित और रहने योग्य कमरा तक न मिले, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रायगढ़ जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर लैलूंगा थाना जिले के पुलिस थानों में दर्ज है।
पुलिस आवासों की स्थिति पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
फरवरी 2026 की एक प्रकाशित रिपोर्ट में भी रायगढ़ जिले के पुलिस आवासों की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार लैलूंगा में 13 पुलिस आवासों में से 9 आवास उपयोग में बताए गए थे।
वहीं, राज्य के बजट दस्तावेज में पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए नए आवास निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने का उल्लेख भी है।
सवाल—आखिर कब सुधरेगी पुलिस स्टाफ की आवासीय व्यवस्था?
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि लैलूंगा थाना परिसर अथवा पुलिस स्टाफ के आवासों का विभागीय निरीक्षण कराया जाए। जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच कर जहां मरम्मत संभव है वहां तत्काल मरम्मत तथा जहां भवन रहने योग्य नहीं हैं, वहां नए आवास की व्यवस्था की जाए।
जनता की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों को ही यदि जर्जर और असुरक्षित भवनों में रहने की मजबूरी हो, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि पुलिस विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं।







