मानसून में लिंकेज का कोयला घटने से उद्योगों की बढ़ी परेशानी, खुले बाजार से 70-75 फीसदी तक खरीदारी
रायपुर। मानसून के दौरान छत्तीसगढ़ के स्पंज आयरन उद्योगों के सामने कोयले की उपलब्धता को लेकर चुनौती बढ़ गई है। लिंकेज के तहत मिलने वाला कोयला जरूरत के मुताबिक उपलब्ध नहीं होने से उद्योग संचालकों को खुले बाजार से अधिक मात्रा में कोयला खरीदना पड़ रहा है। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। खुले बाजार में कोयले की कीमत में करीब 40 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बताया जा रहा है कि जिस कोयले की कीमत पहले करीब 6,500 रुपये प्रति टन थी, वह अब बढ़कर लगभग 9,500 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। कोयले की कीमत में इस बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में स्पंज आयरन और इसके बाद सरिया की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
80 के करीब स्पंज आयरन उद्योग
छत्तीसगढ़ में करीब 80 स्पंज आयरन उद्योग संचालित हो रहे हैं। इन उद्योगों को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के माध्यम से लिंकेज कोयला उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि मानसून के दौरान कई कोयला खदानों में पानी भरने और उत्पादन व आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कोयले की उपलब्धता पर असर पड़ा है।
वहीं, कोयला आपूर्ति में पावर सेक्टर को प्राथमिकता दिए जाने के कारण स्पंज आयरन उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार लिंकेज कोयला नहीं मिल पा रहा है। उद्योग संचालकों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में भी लिंकेज से उनकी 100 फीसदी जरूरत पूरी नहीं होती। ऐसे में उन्हें लगभग 20 से 25 फीसदी कोयला खुले बाजार से खरीदना पड़ता है।
अब 70 से 75 फीसदी कोयला बाजार से खरीदने की नौबत
उद्योगों के मुताबिक वर्तमान स्थिति सामान्य से अलग है। लिंकेज में कमी के कारण अब करीब 70 से 75 फीसदी तक कोयले की जरूरत खुले बाजार से पूरी करनी पड़ रही है। बाजार में कीमतें पहले से अधिक होने के कारण इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।
स्पंज आयरन बनाने में बड़ी मात्रा में कोयले की जरूरत होती है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार एक टन स्पंज आयरन के उत्पादन में करीब 1.6 टन कोयला खर्च होता है। ऐसे में कोयले की कीमत बढ़ने का प्रभाव उत्पादन लागत पर तेजी से दिखाई दे रहा है।
स्पंज आयरन की लागत में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी
कोयले की बढ़ी कीमतों के कारण स्पंज आयरन उत्पादन की लागत में करीब 20 फीसदी तक इजाफा होने की बात कही जा रही है। वर्तमान में स्पंज आयरन की कीमत करीब 28 हजार रुपये प्रति टन बताई जा रही है। उद्योग संचालकों का अनुमान है कि यदि कोयले की कीमत और आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्पंज आयरन के दाम बढ़ सकते हैं।
लिंकेज का कोयला कम मिलने से बढ़ी लागत
छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार मंडल के मुताबिक उद्योगों को लिंकेज के माध्यम से मिलने वाला कोयला काफी कम हो गया है। खुले बाजार में कोयले की कीमत बढ़ने के कारण उत्पादन लागत पर असर पड़ा है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में स्पंज आयरन के दाम में आगे बढ़ोतरी हो सकती है।
सरिया की कीमतों पर भी पड़ेगा असर
स्पंज आयरन की कीमत बढ़ने का असर सरिया के बाजार पर भी पड़ने की संभावना है। सरिया उत्पादन में स्पंज आयरन के साथ कोयले की लागत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में दोनों तरफ से लागत बढ़ने पर सरिया के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
वर्तमान में सरिया की बेसिक कीमत करीब 42 हजार रुपये प्रति टन बताई जा रही है। कम एमएम के सरिया के लिए करीब 6 हजार रुपये का अतिरिक्त अंतर जुड़ता है, जिससे कीमत लगभग 48 हजार रुपये प्रति टन हो जाती है। इसके बाद 18 फीसदी जीएसटी जोड़ने पर प्लांट स्तर पर कीमत करीब 56,640 रुपये प्रति टन पहुंचती है।
थोक बाजार में सरिया की कीमत करीब 58 हजार रुपये और खुदरा बाजार में करीब 60 हजार रुपये प्रति टन तक बताई जा रही है।
विदेशी कोयले की कीमत भी बढ़ी
सरिया बनाने वाली रोलिंग मिलों के लिए इस्तेमाल होने वाले विदेशी कोयले की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। इंडोनेशिया से आने वाले कोयले की कीमत पहले करीब 12 हजार रुपये प्रति टन थी, जो अब बढ़कर लगभग 16 हजार रुपये प्रति टन हो गई है। यानी कीमत में करीब 4 हजार रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है।
ऐसे में सरिया उद्योग पर दोहरी लागत का दबाव बन रहा है। एक ओर स्पंज आयरन महंगा होने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर रोलिंग मिलों में इस्तेमाल होने वाले विदेशी कोयले की कीमत भी बढ़ चुकी है।
10 से 15 फीसदी तक बढ़ सकते हैं सरिया के दाम
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार यदि कोयले की आपूर्ति और कीमतों की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में सरिया के दाम में करीब 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर निर्माण क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, क्योंकि सरिया मकान, व्यावसायिक भवन और अन्य निर्माण कार्यों में प्रमुख कच्चा माल है।
फिलहाल उद्योगों की नजर लिंकेज कोयले की आपूर्ति पर है। यदि मानसून के बाद खदानों से उत्पादन और आपूर्ति सामान्य होती है तथा उद्योगों को जरूरत के मुताबिक कोयला मिलने लगता है, तो लागत पर दबाव कुछ कम हो सकता है। वहीं, मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर स्पंज आयरन और सरिया दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।






