रायपुर। पांच सौ करोड़ रुपए से ज्यादा के कोल घोटाले में ईओडब्लू- एसीबी ने सोमवार को विशेष अदालत में साढ़े नौ हजार पन्नों का पूरक चालान पेश किया। कोर्ट में पेश किए गए चालान में आरोपियों की भूमिका तथा उनके बीच लेन-देन के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। यह भी बताया गया है कि आरोपियों ने घोटाले को कैसे अंजाम दिया? आरोपियों को सोमवार कोर्ट में उपस्थित होना था, लेकिन आरोपी चालान पेश करने के समय कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।
कोर्ट में जिन लोगों के खिलाफ चालान पेश किया गया है, उनमें कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, भिलाई विधायक देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जय प्रकाश मौर्य, पीयूश कुमार साहू, जोगेंदर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक सुनील अग्रवाल तथा राहुल मिश्रा के नाम शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ आईपीसी धारा बी, 420, 384, 467, 468, 471 एवं 109 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पेश चालान में 25 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली, रकम के वितरण और संपत्तियों में निवेश के विवरण के अलावा आयरन पैलेट परिवहन से 100 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली एवं उसमें तत्कालीन खनिज संचालक की भूमिका का जिक्र है। प्रकरण में पूर्व में एक मुख्य एवं पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं।
आयरन पैलेट परिवहन से 100 रुपए प्रति टन की वसूली
विवेचना में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से भी 100 रुपए प्रति टन की दर से अवैध वसूली के तथ्य सामने आने का जांच एजेंसी ने दावा किया है। लौह अयस्क एवं पैलेट परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव 14 दिसंबर 2021 को संचालनालय से शासन को भेजा गया था। पांच जनवरी 2022 के आदेश से सड़क एवं रेल मार्ग से परिवहन के लिए यह व्यवस्था लागू की गई। इसी दौरान तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य द्वारा पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर उन्हें 100 रुपए प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने के तथ्य मिले हैं। पैलेट उद्योग से वसूली की प्रतिवष्टियां जब्त डायरियों में भी मिली हैं। इस वसूली, संबंधित विभागीय कार्रवाई और उसमें जयप्रकाश मौर्य की भूमिका का विवरण चालान में शामिल किया गया है।
सूर्यकांत ने बनाई थी वसूली की योजना
आरोप है कि, सूर्यकांत तिवारी ने तत्कालीन अधिकारियों एवं अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कोल कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से 25 रुपए प्रति टन की दर से अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई थी। 15 जुलाई 2020 के आदेश से ऑनलाईन ई-परमिट जारी होने से पहले जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया था। विभिन्न जिलों से वसूली गई रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी, जहां उसका हिसाब रखकर आगे वितरण किया जाता था।
डिजिटल साक्ष्य से खुले राज
जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी एवं उसके सहयोगी कोल वसूली की व्यवस्था लागू कराने के लिए विभिन्न जिलों में जाकर बैठकें कर रहे थे। उनके ठहरने के लिए संबंधित जिलों के विश्राम गृहों में सीएम हाउस के नाम से बुकिंग कराए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं। विवेचना में बालको कंपनी का वह ईमेल एवं संबंधित पत्राचार भी जब्त किया गया है, जिसमें लेवी भुगतान के कारण परिवहन बिलों में 25 रुपए प्रति टन की राशि इंसिडेंटल एक्सपेंशेस के रूप में जोड़े जाने का उल्लेख है। आदेश जारी होने के बाद कोयला परिवहन के टीपी पास जारी किए जाने के संबंध में अंबुजा कंपनी द्वारा खनिज विभाग को भेजा गया पत्र भी जब्त किया गया है। उक्त डिजिटल साक्ष्य एवं पत्राचार का विवरण पूरक चालान में शामिल किया गया है।






