लैलूंगा के मातृ एवं शिशु अस्पताल में रेफरल के दौरान विवाद का आरोप; डॉक्टर ने मोबाइल क्षतिग्रस्त करने की भी शिकायत की, निष्पक्ष जांच के लिए CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
लैलूंगा। लैलूंगा स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल (MCH) एक बार फिर विवादों में है। अस्पताल के डॉ. लक्ष्मण पटेल ने नर्सिंग स्टाफ पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार, धमकी देने और मोबाइल को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दी है। डॉक्टर ने घटना के समय की CCTV फुटेज सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

मरीज को रेफर करने के दौरान शुरू हुआ विवाद
डॉ. लक्ष्मण पटेल के अनुसार, 29 सितंबर को अस्पताल पहुंची एक महिला मरीज का ब्लड प्रेशर काफी अधिक था। मरीज की स्थिति को देखते हुए उन्होंने रेफरल कार्ड तैयार कर उसे उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजने का निर्णय लिया।
इसी दौरान पूर्व में हुई एक डिलीवरी से जुड़े पुराने विवाद को लेकर कुछ नर्सिंग स्टाफ के साथ उनकी कहासुनी होने का आरोप है। डॉक्टर की शिकायत के मुताबिक, देखते ही देखते विवाद बढ़ गया।
SC/ST एक्ट में फंसाने की धमकी का आरोप
डॉ. पटेल ने अपनी शिकायत में पंकज कंवर, विशाल वैष्णवी/वैशाली रामटेके और सीमा पैकरा समेत अन्य स्टाफ पर कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने और झूठे SC/ST एक्ट में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
डॉक्टर का यह भी आरोप है कि उनका मोबाइल छीनने की कोशिश के दौरान मोबाइल को नुकसान पहुंचा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
डॉ. पटेल ने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि घटना के समय की CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित किया जाए और फुटेज, रेफरल कार्ड तथा ड्यूटी रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ड्यूटी व्यवस्था और मानसिक दबाव पर भी सवाल
डॉ. पटेल ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और ड्यूटी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक ही डॉक्टर को MCH और CHC दोनों जगह लंबे समय तक ड्यूटी पर रखा जा रहा है। उनके मुताबिक, अत्यधिक कार्यभार से डॉक्टरों पर मानसिक दबाव बढ़ता है, जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।
डॉक्टर ने यह भी कहा है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और पर्याप्त सुरक्षा माहौल उपलब्ध नहीं कराया गया, तो उनके लिए लैलूंगा में ड्यूटी जारी रखना मुश्किल होगा।
सामाजिक संगठनों ने भी जांच की मांग उठाई
मामले को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना की ओर से भी जांच की मांग उठाई गई है। संगठनों ने CCTV फुटेज, रेफरल कार्ड और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच कर पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पीड़ित पक्ष को उचित मुआवजा देने की मांग भी रखी गई है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। अब जांच में CCTV फुटेज, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।






