सीजेआई ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद विशेष सुनवाई, 45 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी और हिरासत के मामलों में अधिकारियों से जवाब तलब; अगली सुनवाई मंगलवार को
नई दिल्ली। दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने नागरिकों की आवाजाही, इंटरनेट सेवाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।
अदालत ने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, इंटरनेट सेवाओं को बाधित नहीं करने तथा बैरिकेडिंग की समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अलावा हिरासत में नहीं लेने की बात कही। अधिकारियों को पिछली न्यायिक व्यवस्था के कथित उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
अवमानना की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा
सुनवाई के दौरान अदालत के पूर्व आदेशों की कथित अवहेलना का मुद्दा उठा। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाए गए और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं करने के निर्देश दिए थे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नोटिस जारी किए जाने पर आपत्ति जताई। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कारण बताओ नोटिस और अवमानना नोटिस के बीच अंतर स्पष्ट किया। अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने को कहा।
इंटरनेट और सार्वजनिक परिवहन सामान्य रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट सेवाएं कानून के अनुरूप निर्बाध रहनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों का अर्थ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन के वैधानिक अधिकारों को समाप्त करना नहीं है, लेकिन प्रतिबंध कानून के दायरे में होने चाहिए।
पीठ ने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा लोगों की आवाजाही बहाल रखने पर जोर दिया। अदालत ने यातायात को सुचारु बनाने और विभिन्न स्थानों पर लगाई गई बैरिकेडिंग की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।
45 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी को लेकर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित किए जाने का मुद्दा भी उठा। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान 45 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गई थीं, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई।
अदालत ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से संबंधित स्टेशनों का नक्शा और प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी पेश करने को कहा। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि शुरुआत में 57 स्टेशनों को बंद करने की बात सामने आने के बाद प्रतिबंध 45 स्टेशनों तक कैसे सीमित रहे।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि पिछली रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए थे और सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही थीं।
करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लेने का आरोप
प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान लगभग 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को घरों और ट्रेनों से भी हिरासत में लिया गया। हालांकि, यह संख्या याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में रखे गए दावों पर आधारित है।
वकीलों ने दलील दी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाते हुए हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति और उनकी हिरासत के कानूनी आधार की जानकारी मांगी।
हिरासत में लिए गए लोगों से संबंधित याचिकाओं पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा। इन याचिकाओं में हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति और हिरासत की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। साथ ही, वकीलों और पत्रकारों को अपने पेशेवर दायित्व निभाने से अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाना चाहिए।
मंगलवार को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, पुलिस और संबंधित अधिकारियों से जवाब तथा अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है। इस दौरान अधिकारियों के जवाब और अदालत के पूर्व निर्देशों के पालन से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार किया जाएगा।











