रायगढ़। जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र से जुड़े एक पारिवारिक विवाद ने अब वित्तीय अनियमितताओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर नया मोड़ ले लिया है। मामले में पीड़िता श्रीमती सीमा बघेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने पति पिंगल कुमार बघेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने ₹45 लाख के कथित लोन फ्रॉड, आय संबंधी शपथ-पत्र में विसंगतियों और न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाया है। अपने दावों के समर्थन में उन्होंने न्यायालय के आदेश, पुलिस डायरी और बैंकिंग दस्तावेजों की प्रतियां प्रस्तुत करने की बात कही है। वहीं, पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।
₹22.63 लाख की चोरी के आरोप पर उठाए सवाल
पीड़िता सीमा बघेल के अनुसार, उनके पति ने मीडिया में आरोप लगाया था कि वर्ष 2010 से 2022 के बीच घर की अलमारी से ₹22,63,428 की चोरी हुई है। इस आरोप पर सवाल उठाते हुए पीड़िता का कहना है कि संयुक्त वैवाहिक गृह में कथित चोरी के इस दावे की वास्तविकता और उसके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी नकदी घर में रखी गई थी तो उसके आय स्रोत और उपलब्धता का आधार क्या था।
₹22 हजार मासिक आय का दावा, बैंक रिकॉर्ड को लेकर विवाद
पीड़िता ने आरोप लगाया कि पिंगल कुमार बघेल ने न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत कर स्वयं को वेल्डिंग मजदूर बताते हुए अपनी मासिक आय ₹22 हजार बताई थी।
इसके विपरीत, सीमा बघेल द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में उनके व्यावसायिक खातों में ₹9.50 लाख की कैश क्रेडिट लिमिट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में लगभग ₹50 हजार की मासिक कार लोन किस्त का उल्लेख होने का दावा किया गया है।
पीड़िता ने आय संबंधी कथित विसंगतियों को आधार बनाकर न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 340 के तहत कार्रवाई की मांग की है। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है।
बच्चों की फीस और भरण-पोषण पर अदालत का आदेश
पीड़िता के अनुसार, धरमजयगढ़ के अपर सत्र न्यायाधीश ने 23 सितंबर 2026 को पारित आदेश में बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं किए जाने का उल्लेख किया है।
दस्तावेजों के अनुसार, अदालत ने ₹30 हजार प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने और ₹2.10 लाख का बकाया एरियर 30 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, जेएमएफसी न्यायालय द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत ₹10 हजार प्रतिमाह का अतिरिक्त आदेश भी पारित किए जाने की जानकारी दी गई है।
₹45 लाख के लोन में पैन-आधार के दुरुपयोग का आरोप
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर आरोप पहचान संबंधी दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग को लेकर लगाया गया है। सीमा बघेल का आरोप है कि उनके पैन और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर ₹45 लाख का लोन लिया गया।
पीड़िता के मुताबिक, शिकायत दर्ज कराने के आठ दिनों के भीतर ही उक्त लोन चुकता कर दिया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर वित्तीय लेन-देन और धन के स्रोत की जांच की मांग की है।
पीड़िता ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 138/2026 के तहत चालान न्यायालय में पेश किया है। उनके अनुसार, पिंगल कुमार बघेल इस प्रकरण में विधिवत अभियुक्त हैं। हालांकि, आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना अभी बाकी है।
पति के आचरण को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
प्रेस विज्ञप्ति में सीमा बघेल ने अपने पति पर अन्य महिलाओं के साथ कथित अनुचित संबंध रखने और कार्यालय में महिला कर्मचारियों के साथ मर्यादाहीन व्यवहार करने के आरोप भी लगाए हैं। पीड़िता ने इन आरोपों के समर्थन में वीडियो साक्ष्य होने का दावा किया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले से जुड़ी महिलाओं की पहचान गोपनीय रखी गई है।
घरघोड़ा पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
सीमा बघेल ने घरघोड़ा थाने की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि ₹45 लाख के कथित लोन मामले में कार्रवाई करने में देरी की गई, जबकि ₹22.63 लाख की चोरी के आरोप में उन्हें और उनके भाई को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने गिरफ्तारी के दौरान महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी नहीं होने और केस डायरी में कथित रूप से मनगढ़ंत बयान दर्ज किए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
पीड़िता के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव को BNSS की धारा 218 के तहत अभियोजन स्वीकृति के लिए आवेदन दिया है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और वाहनों की कुर्की के लिए आवेदन
मामले में 28 अक्टूबर 2026 को न्यायालय में एक और आवेदन प्रस्तुत किया गया है। पीड़िता के अनुसार, इसमें पिंगल कुमार बघेल के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ‘प्रकाश फैब्रिकेशन’ और ‘बघेल सेंट्रिंग’ सहित वाहनों की कुर्की की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
अधिवक्ता तथागत श्रीवास्तव बोले- दोनों पक्षों की बात सामने आना जरूरी
पीड़िता के अधिवक्ता तथागत श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस कार्रवाई में कई बार केवल एक पक्ष की बात सामने आती है। अधिवक्ता और पत्रकार की जिम्मेदारी है कि दूसरे पक्ष का दृष्टिकोण भी समाज के सामने आए, जिससे कानून और न्यायिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे।
उन्होंने बताया कि सीमा बघेल के मामले में न्यायालय ने ₹30 हजार प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया है।











