रायगढ़। विवाह से पहले वर-वधू की कुंडली मिलान की परंपरा के साथ अब सिकल सेल जांच और जेनेटिक कार्ड का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा। सिकल सेल रोग की रोकथाम और समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने अनूठी पहल की है। इसके तहत विवाह योग्य युवक-युवतियों की सिकल सेल जांच को प्रोत्साहित करने के लिए पंडितों एवं पुरोहितों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे विवाह संबंधी परामर्श के दौरान परिवारों को इस जांच के महत्व से अवगत करा सकें।
पंडितों और पुरोहितों को दी गई सिकल सेल की जानकारी
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे की अध्यक्षता में 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभाकक्ष में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें समाज के पंडितों एवं पुरोहितों को कुंडली मिलान के साथ वर-वधू के सिकल सेल जांच और जेनेटिक कार्ड के मिलान की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई।
सीईओ जिला पंचायत अभिजीत बबन पठारे ने कहा कि विवाह से पहले वर-वधू को सिकल सेल की जांच अवश्य करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने से भावी दंपती को संतान में सिकल सेल रोग होने की संभावनाओं को समझने और जागरूकता के साथ निर्णय लेने में मदद मिलती है।
आनुवंशिक बीमारी है सिकल सेल, संपर्क से नहीं फैलता रोग
सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि सिकल सेल एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है, जो माता-पिता से संतान में स्थानांतरित हो सकती है। यह संक्रामक बीमारी नहीं है और किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलती। समय पर पहचान, उचित चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार से रोग से प्रभावित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
उन्होंने पंडितों एवं पुरोहितों से अपील की कि वे विवाह संबंधी परामर्श के दौरान वर-वधू और उनके परिवारों को सिकल सेल जांच के लिए प्रेरित करें। साथ ही रोग और इसकी वाहक स्थिति को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करने में सहयोग करें।
जेनेटिक कार्ड की गोपनीयता और सम्मान बनाए रखने पर जोर
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सिकल सेल जेनेटिक कार्ड से जुड़ी जानकारी पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ रखी जानी चाहिए। किसी भी प्रकार की शंका होने पर संबंधित व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र या काउंसलर से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि रोग या वाहक की स्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव अथवा सामाजिक कलंक जैसी स्थिति पैदा न हो।
पंडितों ने भी दिया जागरूकता का भरोसा
कार्यक्रम में उपस्थित पंडितों एवं पुरोहितों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे विवाह के समय कुंडली मिलान के साथ सिकल सेल जांच और कार्ड मिलान के महत्व के प्रति वर-वधू एवं उनके परिवारों को जागरूक करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सीईओ जिला पंचायत अभिजीत बबन पठारे और सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जगत ने सभी पंडितों एवं पुरोहितों को शॉल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित कुमार, शैलेन्द्र मंडल, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. जावेद मारीकर, बायोमेडिकल इंजीनियर नीतिराज सिंह, अतीश तिग्गा, पंकज मिश्रा, जया मजुमदार एवं अनिल साहा सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल विवाह से पहले सिकल सेल जांच को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए समय रहते आनुवंशिक जोखिम की जानकारी, उचित चिकित्सकीय परामर्श और भेदभाव रहित सामाजिक वातावरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।











