रायगढ़, 4 नवंबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। बिहान योजना से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने हुनर और मेहनत से तैयार स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर अच्छी बिक्री की है। इसकी झलक रायगढ़ में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में देखने को मिली, जहां महिला समूहों के स्टॉल पर 50 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हुई।
राज्योत्सव में आकर्षण का केंद्र बने महिला समूहों के स्टॉल
जिला मुख्यालय स्थित संत पूज्य श्री प्रियदर्शी राम ऑडिटोरियम में आयोजित राज्योत्सव में महिला स्व-सहायता समूहों ने विभिन्न प्रकार के स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए। इनमें मिट्टी के पारंपरिक बर्तन, दीये, ब्रास मेटल से बनी सामग्री, टेराकोटा उत्पाद, मसाले, ज्वार का आटा, कृत्रिम आभूषण और मशरूम सहित कई उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
इन उत्पादों की गुणवत्ता, उपयोगिता और पारंपरिक कारीगरी ने लोगों को आकर्षित किया। खास बात यह रही कि इन सभी उत्पादों को स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने स्वयं तैयार किया था।
सितारा समूह ने मिट्टी के उत्पादों से कमाए 9 हजार रुपये
जनपद पंचायत पुसौर के अंतर्गत बारडोली के सितारा स्व-सहायता समूह ने मिट्टी के दीये, पारंपरिक बर्तन और सजावटी सामग्री का स्टॉल लगाया। इनके उत्पादों को लोगों ने खूब पसंद किया। समूह ने लगभग 9 हजार रुपये की बिक्री की।
वहीं एकताल के सुभद्रा स्व-सहायता समूह ने ब्रास मेटल से निर्मित पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया।
पुसौर महिला एफपीओ और उगता सूरज समूह की भी अच्छी बिक्री
पुसौर महिला एफपीओ द्वारा मसाले और ज्वार के आटे से बने उत्पादों का स्टॉल लगाया गया, जहां लगभग 12 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की गई।
इसी तरह बासनपाली के एकता स्व-सहायता समूह ने टेराकोटा उत्पादों का प्रदर्शन किया। गोपालपुर के सरस्वती स्व-सहायता समूह ने कृत्रिम आभूषण, फूल-पत्ती और मशरूम उत्पादों की बिक्री की।
वहीं बासनपाली के उगता सूरज स्व-सहायता समूह ने खाद्य सामग्री का स्टॉल लगाया, जहां लगभग 15 हजार रुपये के उत्पाद बिके। इसके अलावा अन्य स्व-सहायता समूहों ने भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया।
स्थानीय उत्पादों को मिला बाजार, महिलाओं को मिला प्रोत्साहन
राज्योत्सव में महिला स्व-सहायता समूहों को मिले इस अवसर से उन्हें अपने उत्पादों की पहचान बनाने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का मंच मिला। उत्पादों की अच्छी बिक्री से महिलाओं को आर्थिक लाभ के साथ अपने स्वरोजगार को आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन भी मिला।











