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जिले के पशुपालक लम्पी बीमारी से रहे सावधान- जिला प्रशासन…

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जिले के पशुपालक लम्पी बीमारी से रहे सावधान- जिला प्रशासन

कोंडागांव – कलेक्टर कोंडागांव के निर्देशानुसार जिले में लंपी स्किन बीमारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए समस्त पशुपालको को सावधान रहने की आवश्यकता है। डॉ शिशिरकान्त पांडेय , उपसंचालक पशुचिकित्सा सेवाएं द्वारा बताया गया कि जिले में पहला प्रकरण गत वर्ष अक्टूबर माह में विकासखंड फरसगांव के ग्राम भोंगापाल में प्राप्त हुआ था जिसके बाद विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी कर प्रभावित क्षेत्र में आवागमन प्रतिबंधित करते हुए सतर्कता बरतने हेतु निर्देश दिए गए थे। वर्तमान में 1 मई से अब तक कुल 536 प्रकरण दर्ज किए गए जिनमे से 180 का इलाज जारी है एवम शेष ठीक हो चुके है। डॉ नीता मिश्रा, प्रभारी पशुचिकित्सालय कोंडागांव द्वारा बताया गया कि बीमारी के शुरुवात में हाई फीवर के कारण पशु खाना बंद कर देता है, तत्पश्चात बीमार पशु के नाक से स्राव आने के साथ पूरे शरीर मे गुठली जैसे नोड्यूल बनने लगते है,इसी प्रकार तीसरा प्रमुख लक्षण है जिसमें गाय को अनेक स्थानों पर लटकती हुई सूजन दिखाई देती है जिसे वेंट्रल एडिमा (Ventral edema)बोलते हैं। मानो जैसे पानी के भरे हुए गुब्बारे लटक रहे हैं। त्वरित इलाज न होने की स्थिति में यह गुठली पककर फटने लगता है जिससे सेकेंडरी जीवाणु से संक्रमित होने पर गंभीर स्थिति मे अल्सर बनने से मैगोट संक्रमण पश्चात भयावह रूप दिखाई देता है। अतः समस्त पशुपालको से अपील है कि बीमार पशु का स्वयं उपचार न करे एवं उक्त लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नज़दीकी पशुचिकित्सा संस्था को सूचित कर आवश्यक उपचार एवं दिशानिर्देश अनुसार ही कार्यवाही सुनिश्चित करे।

डॉ हितेश मिश्रा, पशु वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र कोंडागाँव से इस संबंध में विस्तृत चर्चा करने पर ज्ञात हुआ कि इस वर्ष बीमारी के विकट रूप में फैलने के दो कारण हो सकते हैं पहला कारण तो यह हो सकता है कि लंपी स्किन डिजीज का वायरस अपने आप को अधिक विकसित कर रहा है और उसकी मारक क्षमता भी बढ़ रही है। दूसरा कारण क्लाइमेट चेंज, मौसम में परिवर्तन इस वायरस के लिए ज्यादा अनुकूल सिद्ध हो रहा है जिससे जिले भर में इस महामारी का प्रकोप बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
अभी तक वैज्ञानिकों का मानना था कि लंपी स्किन डिजीज से गायों की मृत्यु नहीं होती है लेकिन इस बार जो महामारी सामने आई है इसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि की पशुओं में मृत्यु दर भी अधिक है। किंतु अभी तक लंपी बीमारी के पशुओं से मनुष्यों में फैलने की कोई प्रमाणित रिपोर्ट नहीं आई है अतः यह जूनोटिक नही है।
डॉ ढालेश्वरी ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है जो कैपरी पॉक्स वायरस (Capri poxvirus) से फैलती है। यह बीमारी गायों का खून चूसने वाले कीड़ों और मक्खी मच्छरों से फैलती है। सामान्यतया इस बीमारी का प्रकोप वर्षा के दिनों में खासकर अतिवृष्टि के दिनों में महामारी का रूप लेती है क्योंकि हवा में नमी और उपयुक्त गर्मी बीमारी को फैलाने वाले मक्खी मच्छरों के लिए अत्यंत ही उपयुक्त प्रजनन का समय होता है। इसके कारण बड़ी मात्रा में बीमारी फैलाने वाले मक्खी मच्छर उत्पन्न होते हैं जो इस बीमारी को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। गायों के स्वास्थ्य एवं इम्यूनिटी के आधार पर इस बीमारी मैं गायों की मृत्यु दर में बहुत अंतर पाया जाता है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशाशन के आदेशानुसार पशुधन विकास विभाग द्वारा लंपी बीमारी के नियंत्रण हेतु जिला कंट्रोल रूम गठित किया गया है जिसमे डॉ सुरेंद्र नाग जिला नोडल अधिकारी (9893518810) एवं डॉ मनीष साकार, प्रभारी पशु एंबुलेंस इकाई (9399620157) से उपचार एवं आवश्यक दिशानिर्देश हेतु संपर्क कर सकते है। मैदानी स्तर पर नियंत्रण हेतु विभाग द्वारा विकासखंड स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए है जिनमे डॉ नीता मिश्रा (9131564254) कोंडागांव, डॉ चार्ली पोर्ते (8319852463) केशकाल, डॉ पी एल ठाकुर (9009873653) बड़ेराजपुर, डॉ सुदरण मरकाम (8770744682) माकड़ी, डॉ आकांक्षा कश्यप (7999033001) फरसगांव, डॉ कृष्ण कोर्राम (8319354904) मर्दापाल, डॉ प्रियंका ठाकुर (9617565209)धनोरा है। इसके अतिरिक्त नगरपालिका एवं स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद से बीमारी के संक्रमण को रोकने हेतु बीमार पशुओं का उपचार, बायोसेक्यूरिटी मापदंड, आइसोलेशन, अप्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण सहित अन्य उपाय करते हुए रोकथाम एवम बचाव कार्य किए जा रहे है। शहरी क्षेत्र में नगरपालिका की सहयता से वेक्टर कंट्रोल हेतु कीटनाशक छिड़काव एवं जन जागरुकता हेतु प्रचार प्रसार कराया जा रहा है एवम आवारा पशुओं के उपचार हेतु

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चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
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