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हर्षोल्लास के साथ लैलूँगा में मनाया भगवान बिरसा मुंडा 150वा जयंती

मुंडा समाज द्वारा भगवान बिरसा मुंडा 150 वा जन्मोत्सव का भब्य आयोजन…

लोकसभा सांसद के मुख्य आतिथ्य में हुआ आयोजन

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हर्षोल्लास के साथ लैलूँगा में मनाया भगवान बिरसा मुंडा 150वा जयंती

मुंडा समाज द्वारा भगवान बिरसा मुंडा 150वा जन्मोत्सव का भब्य आयोजन…

लोकसभा सांसद के मुख्य आतिथ्य में हुआ आयोजन

हीरालाल राठिया लैलूंगा


लैलूंगा/ भगवान बिरसा मुंडा की  150वा जयंती पर लैलूंगा के मुंडा समाज द्वारा जन्मोत्सव का भब्य आयोजन किया गया। जिसमें मुंडा समाज के द्वारा लैलूंगा शहर में सुबह से रैली निकाली गई । जो कि शांति नगर से रैली का सुभारम्भ किया गया जो अटल चौक अग्रसेन चौक होते हुए ब्लाक आफ़िश से बस स्टैंड चौक पहुँचा। जहां पर भारतीय जनता युवा मोर्चा  के अध्यक्ष अमर अग्रवाल महा मंत्री कृष्णा जायसवाल रोहन यादव एव्म टीम लैलूंगा  के द्वारा उत्साह वर्धन किया गया और उनके लिए जल पान का बौस्था किया गया। तब पस्चात रैली कन्या शाला पहुँचा जहां पर भब्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि  रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, पूर्व मंत्री सत्यानंद राठिया, सहित जनप्रतिनिधियों और मुंडा समाज के वरिष्ठ जन सहित माताओ और बहनों की उपस्थिति रही । जिसमे छत्तीसगढ़ के परंपरागत सभी अथियो का शाल श्री फल और गुलदस्ता देखे स्वागत गीत गायक कर भब्य स्वागत किया गया । आपको बता दे कि भगवान बिरसा मुंडा के नाम से जाने वाले बिरसा मुंडा, मुंडा जाति से संबंधित हैं। इन्होंने अंग्रेज शासकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी एवं मुंडा आदिवासियों के हित की रक्षा की थी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में बिरसा मुंडा का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 में रांची के झारखंड में हुआ था। बिरसा मुंडा एक आदिवासी नेता एवं लोक नायक के रूप में जाने जाते थे। मुंडा जाति से संबंध रखने के कारण उन्हें बिरसा मुंडा कहा जाता था। जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए बलिदान बिरसा मुंडा ने मुंडाओं को जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए बलिदान देने के लिए प्रेरित किया। बिरसा मुंडा का पूरा आंदोलन 1895 से लेकर 1900 तक चला। इसमें भी 1899 दिसंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर जनवरी के अंत तक काफी तीव्र रहा। पहली गिरफ्तारी अगस्त 1895 में बंदगांव से हुई। 24 दिसंबर 1899 में शुरु हुए आंदोलनों से तीर के माध्यम से पुलिस थाने पर हमला किया था और वहां आग लगा दी थी। सेना के साथ उनकी सीधी मुठभेड़ हुई थी, जिसके कारण से गोली लगने पर बिरसा मुंडा के बहुत से साथ ही मारे गए और मुंडा जाति के दो व्यक्तियों ने धन के लालच में आकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करवा दिया था। जहां 9 जून 1900 में बिरसा मुंडा की मृत्यु हो गई।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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