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पर्यावरण मंत्री के गृह ज़िले रायगढ़ के तमनार में हरियाली का मखौल, जंगल का संहार, और आदिवासी जनता की गिरफ्तारी – क्या सरकार बिक चुकी है?…

“मां के नाम एक पेड़, और धरती मां की छाती पर चला दिया गया बुलडोज़र काट दिए हज़ारों पेड़…!”

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पर्यावरण मंत्री के गृह ज़िले रायगढ़ के तमनार में हरियाली का मखौल, जंगल का संहार, और आदिवासी जनता की गिरफ्तारी – क्या सरकार बिक चुकी है?…

“मां के नाम एक पेड़, और धरती मां की छाती पर चला दिया गया बुलडोज़र काट दिए हज़ारों पेड़…!”

रायगढ़ | तमनार – छत्तीसगढ़ में पर्यावरण और जन-अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला अब तमनार की ज़मीन पर दर्ज हो चुका है। जहाँ एक ओर राज्य के पर्यावरण मंत्री ने अपने गृह ज़िले रायगढ़ के तमनार में “मां के नाम एक पेड़” लगाकर मीडिया के सामने संवेदनशीलता का प्रदर्शन किया, वहीं ठीक अगले ही दिन उसी क्षेत्र के मुड़ागांव में हज़ारों पेड़ों की निर्मम कटाई कर दी गई।

जंगल बचाने पर जेल, जंगल काटने पर संरक्षण : यह पूरी कार्यवाही न सिर्फ बिना ग्रामसभा की अनुमति, बल्कि छत्तीसगढ़ पंचायत अधिनियम, वन अधिकार कानून, और संविधान की 5वीं अनुसूची के स्पष्ट उल्लंघन में की गई।

जब स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों ने इसका शांतिपूर्ण विरोध किया, तो उनका स्वागत पुलिस बल, गिरफ्तारी और दमनकारी कार्रवाई से किया गया।

50 से अधिक ग्रामीणों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिनका ‘अपराध’ बस इतना था कि उन्होंने अपने जंगल और अपने अधिकारों की रक्षा की माँग की थी।

किसके हाथों बिक चुके हैं पर्यावरण मंत्री? : 

जब पेड़ों की हत्या हो रही थी — मंत्री मौन थे।
जब ग्रामसभा को रौंदा गया — मंत्री मौन थे।
जब निर्दोष ग्रामीणों को जेल भेजा गया — मंत्री फिर भी मौन थे।

तो क्या यह मौन संयोग है? या समझौता?

“किस कंपनी के दबाव में यह चुप्पी साधी गई?”
“क्या पर्यावरण मंत्री अब जनता के नहीं, पूंजीपतियों के प्रतिनिधि बन चुके हैं?”
“क्या रायगढ़ की धरती अब केवल मुनाफे की मंडी बन चुकी है?”

यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं – यह संविधान, संस्कृति और जन-स्वर का गला घोंटना है : इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब

ग्रामसभा के निर्णयों का कोई मूल्य नहीं,
आदिवासी अधिकारों की कोई परवाह नहीं,
और जनता की सहमति के बिना ही जंगल, ज़मीन और भविष्य का सौदा किया जा रहा है।

तमनार बोलेगा, और अब पूरे छत्तीसगढ़ की आवाज़ बनेगा : तमनार की यह आग सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहेगी।

यह अब एक आंदोलन का शंखनाद है –
👉 जंगल के लिए
👉 संविधान के लिए
👉 ग्रामसभा की ताकत के लिए
👉 और सत्ता के विकृत मुनाफाखोर चरित्र के खिलाफ

जनता की माँगें स्पष्ट हैं –

जंगल की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए
ग्रामसभा की अनुमति के बिना हुई सारी कार्यवाही को अमान्य घोषित किया जाए
गिरफ्तार ग्रामीणों को तुरंत रिहा किया जाए
पर्यावरण मंत्री को उनके पद से हटाया जाए
संबंधित कंपनी और अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए

“इंकलाब ज़िंदाबाद!”
“जल-जंगल-जमीन हमारा है!”
“किसके हाथ बिक चुके हैं मंत्री जी — जवाब दो!”

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चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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