








लैलूंगा में गणेशोत्सव का धूमधाम भरा आगाज़: जनपद उपाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ‘सुखन’ के नेतृत्व में गूंजा गांव – भक्ति, उत्सव और एकता की बेमिसाल तस्वीर
लैलूंगा/गोसाईडीह गांव की गलियां भक्ति के रंग में रंगी हुईं, मंदिर परिसर गगनभेदी जयघोषों से गूंजता और हर चेहरे पर उत्साह का आलोक… यही नजारा देखने को मिला जब लैलूंगा गोसाईडीह में इस वर्ष भी सार्वजनिक श्रीगणेश पूजन महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन की बागडोर जनपद उपाध्यक्ष अजेय योद्धा मनोज अग्रवाल ‘सुखन’ ने संभाली। मीरा दातार राइस इंडस्ट्रीज और समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित यह उत्सव गांव को भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता के सूत्र में बांधने का माध्यम बना।
27 अगस्त को मूर्ति स्थापना – गूंजे ढोल-नगाड़े, झूमे भक्त
रविवार को विधि-विधान के साथ गणेश प्रतिमा की स्थापना हुई। ढोल-नगाड़ों की ताल और “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। महिलाएं मंगलगीतों में लीन थीं, तो युवा आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाकर सामूहिक शक्ति का परिचय दे रहे थे।
भक्ति-गीत, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण
28 से 30 अगस्त तक संध्या भजन और आरती ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। 2 सितंबर को पुनः भक्ति की धारा बही, जबकि 2 सितंबर रात को संगीतमय सुंदरकांड और रामायण मय प्रवचन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। सुप्रसिद्ध भजन गायकों चाहत खान, ललिता नाग और रीना पैकरा ने अपनी गायकी से मन मोह लिया, वहीं प्रवचन में किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री की वाणी ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
सफलता का श्रेय सामूहिकता और नेतृत्व को
गांव में इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होता है तो कोई भी पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक बन जाता है। आयोजन की सफलता का श्रेय मनोज अग्रवाल ‘सुखन’ को दिया गया, जिनके नेतृत्व में हर वर्ग ने उत्सव में बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
गूंज उठा गांव – गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया…
भक्ति और आनंद का यह संगम न केवल भगवान गणेश की आराधना का पर्व बना, बल्कि गांव की पहचान और सामूहिक सहयोग की मिसाल भी।
लैलूंगा में गणेशोत्सव अब सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि जनआस्था और सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा पर्व बन चुका है।








