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कलेक्टर का ट्रांसफर आदेश हवा-हवाई! लैलूँगा से धरमजयगढ़ तक अटका महेश्वर प्रसाद का कार्यभार, 10 दिन की समय-सीमा भी बेअसर

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कलेक्टर का ट्रांसफर आदेश हवा-हवाई! लैलूंगा से धरमजयगढ़ तक अटका महेश्वर प्रसाद का कार्यभार, 10 दिन की समय-सीमा भी बेअसर

रायगढ़/ लैलूंगा जिला प्रशासन रायगढ़ में स्थानांतरण नीति 2025 को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। शासन के आदेश और कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी स्थानांतरण सूची में साफ-साफ निर्देश दिया गया था कि स्थानांतरित कर्मचारी अपने नए पदस्थापना स्थल पर 10 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करें, अन्यथा उन्हें स्वमेव कार्यमुक्त माना जाएगा। लेकिन हैरत की बात यह है कि 30 जून को जारी आदेश के बावजूद आज तक संबंधित कर्मचारी ने नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

मामला लैलूंगा राजस्व विभाग के सहायक ग्रेड-02  महेश्वर प्रसाद यादव का है। शासन के निर्देश पर उन्हें लैलूंगा से स्थानांतरित कर तहसील कार्यालय धरमजयगढ़ भेजा गया था। आदेश में साफ लिखा गया था कि 10 दिन के भीतर कार्यमुक्त होकर नए पदस्थापना स्थल में रिपोर्ट करें। लेकिन तय अवधि बीत जाने के बाद भी महेश्वर यादव ने कार्यभार नहीं संभाला है। यह स्थिति शासन के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना को दर्शाती है।

सूत्रों का कहना है कि लैलूंगा कार्यालय से आज तक उन्हें विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया गया है। वहीं धरमजयगढ़ तहसील कार्यालय में भी उनकी अनुपस्थिति के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। इससे आम जनता को प्रतिदिन होने वाले राजस्व संबंधी कार्यों में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शासन और कलेक्टर का आदेश ही कागजों में दबकर रह जाए, तो आम आदमी की समस्याओं का हल कौन निकालेगा?

इस पूरे घटनाक्रम ने कर्मचारियों की ‘मनमानी’ और प्रशासन की ‘लाचारगी’ दोनों को उजागर कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले को स्वमेव भारमुक्त माना जाएगा, तो फिर प्रशासन अब तक कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा? क्या आदेश केवल फाइलों में सीमित रखने के लिए जारी किए गए थे या फिर कुछ कर्मचारियों को खुली छूट है कि वे मनमुताबिक नियमों को तोड़-मरोड़ सकें?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कर्मचारी के स्थानांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिला प्रशासन की साख और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि आदेश का पालन नहीं होता और उच्च अधिकारियों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती, तो भविष्य में अन्य कर्मचारी भी आदेशों को मज़ाक समझने लगेंगे।

जनता का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि एक ओर शासन बार-बार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करता है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत में आदेशों का पालन करवाने में प्रशासन पूरी तरह विफल दिखाई देता है। अब देखना होगा कि कलेक्टर और प्रभारी मंत्री इस मसले पर सख्ती दिखाते हैं या फिर यह मामला भी “आदेश जारी हुआ, लेकिन पालन नहीं हुआ” वाली फाइलों में दफन हो जाएगा।

कुल मिलाकर, लैलूंगा से धरमजयगढ़ तबादले का यह मामला एक ‘एडमिनिस्ट्रेटिव ड्रामा’ बनकर उभर गया है, जिसने जिले की कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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